ब्रान्ड शिवराज के भरोसे प्रदेश में कमल खिलाने की कोशिश

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०- अरुण पटेल
भाजपा ने जो 176 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की हैउसको देखकर यह कहा जा सकता है कि उसने आजमाये हुएपुराने चेहरों के सहारे चौथी बार मध्यप्रदेश में ब्रांड शिवराज केभरोसे जीत की इबारत लिखने की दिशा में कदम बढ़ाया है।हालांकि पहली सूची में जिन चेहरों को जगह मिल गयी हैउसमें से कुछ की जीत के प्रति पहले से ही संशय रहा है, वहींसंघ ने जो फीडबैक दिया था उसे दरकिनार करते हुए नयेचेहरों को मौका देने का जोखिम नहीं उठाया गया है। जिन्हेंउम्मीदवार बनाया गया है उनमें ऐसा कुछ नया नहीं है जो सूचीको और अधिक चमकदार बनाता दिखे। भाजपा ने कुछ हारेहुए उम्मीदवारों पर तो दांव लगाया ही है वहीं कुछ उम्रदराजलोगों को भी टिकिट थमा दी है। पीढ़ी परिवर्तन की जगहवंशवाद का एक नया दौर सामने आया है। लगता है भाजपा नेअसंतोष और बगावत को थामने के लिए यथास्थितिवाद परज्यादा जोर दिया है और नये चेहरों के नाम पर केवल नेतापुत्रों को ही अवसर प्रदान किया। यह कहा जा सकता है किपूरी तरह से शिवराज सिंह चौहान की चली है और उन्होंनेजिसे चाहा उसे टिकिट मिल गया है। भाजपा या तो जीत केप्रति अति आत्मविश्?वास में है या फिर उसे इस बात कापक्का भरोसा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के जिताऊ माइक्रो बूथ मैनेजमेंटऔर शिवराज के आभामंडल के चलते जिस भी चेहरे कोमैदान में उतार देगी वही बाजी मार लेगा तथा आसानी से200 प्लस का लक्ष्य पूरा हो जाएगा। इस बार चुनावीसंभावनाओं को चमकीला बनाने के लिए एक तरफा नहींबल्कि कांग्रेस और भाजपा दोनों की ओर से दलबदल कातड़का लगाया जा रहा है। भाजपा ने कांग्रेस के पूर्व सांसद एवंदलित नेता प्रेमचंद गुड्डू को पार्टी में शामिल कराया तो उसके24 घंटे भी नहीं बीते थे कि कांग्रेस ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंहचौहान के सगे साले संजय सिंह को कांग्रेस में शामिल कराकरदीपावली पूर्व एक बड़ा धमाका करते हुए भाजपा को तगड़ाझटका दे दिया है।

टिकिट कटने की आशंका में नरसिंहपुर जिले के तेंदूखेड़ा केभाजपा विधायक संजय शर्मा और एक पूर्व विधायककमलापत आर्य के कांग्रेस प्रवेश तथा इससे पूर्व कुछ औरभाजपा नेताओं के कांग्रेस में जाने के कारण शायद भाजपा नेबड़ी संख्या में विधायकों के टिकिट काटने का जोखिम नहींलिया बल्कि उन लोगों के टिकिट काट दिए जिनके कारणकिसी बड़े विद्रोह की आशंका नहीं थी। ज्यादातर ऐसेविधायक बेटिकिट हो गए हैं जिनका भाजपा में कोईगॉडफादर नहीं था। भाजपा की पूरी सूची पर नजर डालें तोलगता है कि मोदी और शाह का शिवराज पर पूरा भरोसा हैऔर उन्हें उम्मीद है कि वे चौथी बार भी भाजपा की सरकारबनाने का करिश्मा कर दिखायेंगे, जब करिश्मा पर भरोसा होतो फिर ऐसे में चेहरे गौण हो जाते हैं। पिछले चुनावों में कुछक्षेत्रों में यह नारे लगते थे कि “शिवराज जरुरी है तुकोजीराव,नंदिनी मरावी हमारी मजबूरी है।” इसी प्रकार के नारे अन्यकुछ क्षेत्रों में भी नाम बदल कर लगाये जाते थे लेकिन इसकेबावजूद अलोकप्रिय चेहरे भी शिवराज के आभामंडल मेंचुनावी वैतरणी पार गए थे। भाजपा की सूची अभी अधिकउत्साहजनक भले न लग रही हो लेकिन कांग्रेस की क्षमताओंपर भी अविश्?वास नहीं करना चाहिए, हो सकता है वहां भीगुटबंदी की दलदल में ऐसी ही सूची सामने आ जाये जिसकेचलते भाजपा की यह सूची ज्यादा चमकदार नजर आने लगे।वैसे कांग्रेस का दावा है कि इस बार जिताऊ चेहरों पर ही दांवलगायेगी, लेकिन वह किन्हें जिताऊ मानती है वह सूची सामनेआने पर ही पता चल सकेगा।

भाजपा की जो सूची सामने आई है उसके चलते कई जगहअसंतोष एवं बगावत के स्वर भी सुनाई पडऩे लगे हैं, लेकिननामजदगी पर्चे वापस लेने का समय गुजर जाने के बाद ही यहपता चल सकेगा कि किस-किस पार्टी के कितने-कितने बागीचुनाव मैदान में हैं। उसके पहले तक का समय तो कांग्रेस औरभाजपा दोनों में ही बगावती स्वर गुंजायमान का ही रहेगा, क्योंकि जिसकी टिकिट कटेगी या जिसे टिकिट मिलने कीउम्मीद होगी वह अपनी कोशिशें जारी रखेगा। भाजपा कीसूची देखते हुए यही कहा जा सकता है कि उसके लिए पन्द्रहसाल की एन्टीइंकंबेंसी, एट्रोसिटी एक्ट, अधिकांश विधायकोंके प्रति जनता ही नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं का आक्रोश भीकोई बड़ी चुनौती नहीं है और वह चौथी बार सरकार बनाने केलिए पूरी तरह से आश्?वस्त है। वैसे भाजपा ही नहीं बल्किसभी राजनीतिक दलों को यह लगता है कि उनसे सुंदर चेहरा-मोहरा और आकर्षण किसी दूसरे दल में नहीं है। सबने अपने-अपने ड्राइंग रुम में ऐसे आइनों को लगा रखा है जिसमें उन्हेंकेवल अपनी शक्ल, सूरत और सीरत सबसे अधिक सुंदरनजर आती है।

भाजपा ने उन चेहरों पर भी दाँव लगाने से परहेज नहीं कियाजो 2003 की उमा भारती की आंधी या 2013 की मोदी वशिवराज की लहर में चुनाव नहीं जीत पाये थे, या फिर उसकेबाद हुए उपचुनाव में भी हार गए थे। यहां तक कि भाजपाविधायक प्रभात पांडे के निधन के बाद बहोरीबंद के उपचुनावमें उनके बेटे प्रणय प्रभात पांडे को उम्मीदवार बनाया गया थाजो कांग्रेस के कुंवर सौरभ सिंह से 7 हजार 977 मतों केअन्तर से उस समय चुनाव हार गए थे जबकि मुख्यमंत्रीशिवराज सिंह चौहान ने वहां जमकर प्रचार किया था औरअनेक मंत्रियों ने भी डेरा डाल रखा था। इसके बावजूद भी इसबार फिर भाजपा ने प्रभात पांडे पर ही दांव लगाया है। इसीप्रकार कुछ ऐसे मंत्री भी टिकिट पाने में सफल रहे जिनके प्रतिक्षेत्र में भारी असंतोष है। उदाहरण के तौर पर लोक निर्माणमंत्री रामपाल सिंह शिवराज की नजदीकियों का फायदा उठातेहुए टिकिट तो पा गए हैं लेकिन अपना क्षेत्र नहीं बदलवा पायेहैं, अब उन्हें यहां बड़ी संख्या में रघुवंशी मतदाताओं केविरोध का सामना करना पड़ेगा। उनकी पुत्रवधु जिसे उन्होंनेबाद में स्वीकार किया, उसकी आत्महत्या के मामले मेंरघुवंशी समाज काफी आक्रोशित है और उसने रामपाल केविरोध में कई जगह धरना-प्रदर्शन भी किए थे। फिर भी यदिसिलवानी या उदयपुरा से कांग्रेस ने रघुवंशी समाज केकिसी दावेदार को टिकिट नहीं दी तो फिर रामपाल भी मुकद्दरके सिकंदर साबित हो सकते हैं।

और यह भी

प्रदेश की राजनीति में मनोवैज्ञानिक ढंग से अपने प्रतिस्पर्धीको हतोत्साहित करने व उसमें पराजय-बोध जागृत करने केलिए दलबदल का तड़का लगाने में भाजपा ने महारत हासिलकर ली थी, लेकिन अब कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं हैऔर दोनों ही एक-दूसरे के नहले पर दहला लगा रहे हैं। कांग्रेसने भाजपा की मंत्री दर्जा प्राप्त पद्मा शुक्ला को अपने पालेमें कर लिया और भाजपा विधायक संजय शर्मा तथा पूर्वकांग्रेस व पूर्व भाजपाई विधायक कमलापत आर्य ने पुन: कांग्रेस का हाथ थाम लिया तो भाजपा ने भी एक बड़ा धमाकाकरने का दावा करते हुए पूर्व सांसद और दलित नेता प्रेमचन्दगुड्डू को भाजपा में शामिल कर लिया। लेकिन इसके बादकांग्रेस ने मुख्यमंत्री के साले संजय सिंह को कांग्रेस प्रवेशकराकर महाधमाका कर दिया जिसकी धमक से भाजपा सेअधिक शिवराज प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस अध्यक्षकमलनाथ का दावा है कि अभी तो यह ट्रेलर है पूरी फिल्मआना बाकी है। भाजापा ने जिस समय दलबदल की राजनीतिशुरु की थी वह दौर अलग था, अब प्रदेश कांग्रेस की कमानकमलनाथ के हाथ में है और वे नहले पर दहला लगाने कीराजनीति करते हैं। नये-नवेले कांग्रेसी संजय सिंह का कहनाहै कि वह कमलनाथ के छिंदवाड़ा विकास मॉडल से प्रभावितहैं और अब प्रदेश को शिवराज की नहीं नाथ की यानीकमलनाथ की जरुरत है। उनका आरोप था कि भाजपा मेंपरिवारवाद और वंशवाद पूरी तरह हावी हो चुका है तथाप्रधानमंत्री मोदी बात तो कामदारों की करते हैं और भाजपाटिकिट नामदारों को थमा देती है, कामदार किनारे कर दिएजाते हैं। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने शिवराज पर तंज कसाकि वे अपने परिवार को ही नहीं संभाल पा रहे तो प्रदेश कोकैसे संभालेंगे। कांग्रेस मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेंद्रगुप्ता का यह तंज भी पूरी तरह मौजू है कि शिवराज ने तोलोगों से रिश्ते बनाकर अपने आपको मामा बनाया है, वे तोनकली मामा हैं, लेकिन उनके बेटे कार्तिकेय के असली मामासंजय कांग्रेस में आ गए हैं।
०- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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