बुन्देलखण्ड पैकेज शिवराज के स्वर्णिम मध्यप्रदेश का बड़ा घोटाले को दबाने पर उठ रहे सवाल

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह जुमला कि ना खाऊंगा न खाने दूंगा, तो वहीं इसी जुमले के बीच पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का यह दावा कि मध्यप्रदेश में और खासकर १३ वर्षों के शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में मध्यप्रदेश का बहुत विकास हुआ है इन भाजपाई नेताओं के दावों को लेकर प्रदेश की राजनीति में कई तरह की चर्चाएं लोग चटकारे करते नजर आ रहे हैं तो वहीं इस लाख टके का सवाल करते नजर आ रहे हैं कि एक तरफ तो भाजपा के नेता चाहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हों या अमित शाह या प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सभी भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़े-बड़े दावे करते हैं और यह भी जुमला आये दिन लोगों को सुनाते रहते हैं कि भाजपा के राज में विकास की गंगोत्री बही है जो काम ७० साल में कांग्रेसी सरकारों ने नहीं किया वह भाजपा के शासनकाल में इस प्रदेश का विकास हुआ है। विकास के मुद्दे पर प्रदेश के कई लोगों की अपनी अलग-अलग है तो वहीं लोग यह कहते नजर आते हैं कि केवल विकास के नाम पर गुणवत्ताविहीन सड़कें बनाने का ढिंढोरा पीटने से लगता है कि विकास की परिभाषा भाजपा के नेताओं की अलग है और उसमें विाकस के नाम पर भ्रष्टाचार को प्रमुखता देना उनकी नियति है, जिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने १३ वर्षों के शासनकाल में विकास का ढिंढोरा पीटते रहे उसी विकास की पोल उनके ही विधानसभा क्षेत्र में बुदनी के रेहटी गांव की महिलाओं ने उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह को पानी की समस्या को लेकर जो खरी-खोटी सुनाई उन महिलाओं के आक्रोश को देखकर साधना सिंह को वहां से रफू चक्कर ही होने में ही अपनी भलाई समझी। यदि यह विकास है तो विकास कि से कहेंगे विकास के नाम पर यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान मध्यप्रदेश की आजादी के बाद विकास के लिये, विकास से वंचित बुन्देलखण्ड पैकेज के नाम पर जो राशि दी गई थी इतनी भारी भरकम राशि खर्च करने के बावजूद भी बुन्देलखण्ड में विकास आज भी नजर नहीं आ रहा है। हाँ, यह जरूर हुआ कि उसी बुन्देलखण्ड के छतरपुर की जनप्रतिनिधि ललिता यादव जो मंत्रीमण्डल में शामिल होते ही अपने प्रभार वाले जिले में परिवार के सदस्यों के साथ-साथ ठेकेदारों के लाव-लश्कर को लेकर जिला योजना समिति की बैठक लेने पहुंची थी उनकी सम्पत्ति में जरूर २४३ प्रतिशत की वृद्धि हुई। बुंदेलखण्ड पैकेज में विकास के नाम पर शिवराज सिंह की सरकार की परम्परा के अनुरूप जो कागजों में जो काम दर्शाये गये उसके चलते जो बंदरबांट हुआ उसमें करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ और वह घोटाला भी हाईकोर्ट के आदेश पर हुई जांच में प्रथम दृष्टया काम कराने वाले अधिकारियों को दोषी पाये जाने के बावजूद भी उन दोषी अधिकारियों पर शिवराज सरकार मेहरबान क्यों है इसको लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं साथ ही यह भी सवाल उठ रहे हैं कि जिस मुख्यमंत्री के स्वर्णिम मध्यप्रदेश में यूपीए सरकार के द्वारा दिये गये बुन्देलखण्ड पैकेज के नाम की राशि में घोटाले हुए और उन दोषियों पर आज भी सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की इसको लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं और भाजपा के नुमाइंदों की इसमें संाठगांठ को लेकर भी चर्चा है अब सवाल यह उठता है कि जो भाजपा इस प्रदेश की जनता को गुमराह करने के लिये नित्य नये-नये इस तरह के विज्ञापन निजी टीवी चैनलों और समाचार पत्रों में आ रहे हैं उन विज्ञापन का जवाब तो यह बुन्देलखण्ड पैकेज के नाम पर हुआ घोटाला ही है जिसको लेकर मुख्यमंत्री से लेकर कोई भाजपा नेता तैयार नहीं है इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा के इस दावे जिसमें अपनी पार्टी की नीति, नियत और नेता को लेकर जो दावे करती है उसमें कितनी सच्चाई है, तो यह घटना तो मुख्यमंत्री के उस स्वर्णिम मध्यप्रदेश की है अब सवाल यह उठता है कि समृद्ध मध्यप्रदेश का उस स्थिति में जब प्रदेश का खजाना खाली है और राज्य दो लाख करोड़ से अधिक का कर्जदार है तो अब समृद्ध मध्यप्रदेश के भाजपाई जुमले की क्या स्थिति होगी ?

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