बदले-बदले मेरे ‘सरकार’ नजर आते हैं … ?

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०-ओमप्रकाश मेहता
प्रचंड बहुमत से देश में फिर से अपनी सरकार बनाने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी में भी अचानक भावी परिवर्तन सा नजर आने लगा है, मोदी की बदली हुई चारल, परिवर्तन चरित्र और विनम्र चेहरा देखकर आज हर कोई आश्चर्यचकित है, अपनी हठ, जिद और अहम के लिए प्रसिद्ध हो चुके नरेन्द्र भाई मोदी में आया यह अचानक परिवर्तन हर किसी को विस्मित कर रहा है, किन्तु देश की यह आम धारण है कि मोदी अब देश के सच्चे प्रथम सेवक की भूमिका अख्तियार करने का प्रयास कर रहे हैं और अपने पाँच साल के शासनकाल के खट्टे-मीठे अनुभवों के आधार पर अब उन्होंने जहां अपने अगले पाँच साल के शासनकाल में देश का नया इतिहास लिखने की ठान ली है, वहीं वे अपने आप को बदलने का भी प्रयास कर रहे हैं, ऐसा लगता है कि वे अब सब को साथ लेकर ”निन्दक नियरे राखिये” के मंत्र को अपनाकर और इसी शुद्ध भावना के तहत उन्होंने संसद का पहला सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष को महिमा मंडित करने का प्रयास किया और यह स्वीकार किया कि विपक्ष का एक-एक शब्द की चिंता छोड़ सरकार के साथ एकजुट होकर देश को बदलने की दिशा में हाथ बंटाना चाहिए, उन्होंने कहा विपक्ष का अपना महत्व है, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। इस प्रकार संसद के पहले सत्र के पहले ही दिन मोदी ने बिना किसी स्वार्थ के जो प्रतिपक्ष की तरफ सहयोग का हाथ बढ़ाया, वह प्रशंसनीय है, यदि अगले पाँच साल अपनी सरकार के साथ प्रतिपक्ष को भी मोदी ने इतनी ही चिंता की तो यह देश पूरे श्वि में प्रजातंत्री देशों का सरताज बन सकता है। मोदी अपने पिछले पाँच साला कार्यकाल से अपने देशभक्ति के सपनों को साकार रूप इसलिए नहीं दे पाए थे, क्योंकि राज्यसभा (ऊपरी सदन) में उन्हें बहुमत हासिल नहीं था और कोई भी विधायक या संविधान संशोधन प्रस्ताव दोनों सदनेां से पारित होने के बाद ही मूर्तरूप ग्रहणक रता है, किंतु इस बार तो राज्यसभा भी बदली हुई स्थितियां हैं और अगले कुछ दिनों में होने वाले कुछ सीटों के चुनाव के बाद राज्यसभा में भी मोदी की स्थिति मजबूत हो जाएगी, इसलिए वे चाहते तो बिना प्रतिपक्ष की परवाह किए कोई भी विधेयक या संशोधन पारित करवा सकते थे, किंतु मोदी ने उपलब्धियों से फलों से लदे और झुके वृक्ष की भूमिका अदा कर प्रतिपक्ष को वृक्ष को छांव में आकर मीठे फलों का स्वाद चखाने का आमंत्रण दिया, यह उनके बदले हुए व्यक्तित्व का साक्षात स्वरूप है। अब मोदी अगले पाँच साल के कार्यकाल के लिएएक महान सपना संजाये हुए हैं, जिसमें देश को हर क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर पर ले जाने का सपना है और इसमें प्रतिपक्ष भी सहभागी बने इसी आकांक्षा से मोदी ने इतिहास को अपने साथ जाने का निमंत्रण दिया है, जिससे इस पुनीत कार्य मं सभी की अहम भूमिका के साथ सहयोग प्राप्त हो सके। यदि बिखरे हुए प्रतिपक्ष ने मोदी के आमंत्रण को राजनीतिक चाल व समझ गंभीरता से लेकर मोदी को सहयोग करने का देशहित मेूं संकल्प लिया तो यह देश के पिदले सत्तर साल के इतिहास की महत्वपूर्ण मसाल बनकर सामने आएगा और पूरे विश्व के देश इसे एक अनुकरणीय पहल मानकर इसका अनुकरण करेंंगे। यद्यपि मोदी ने यह भी कहा है कि प्रतिपक्ष का एक-एक शब्द उनके लिए मूल्यवान है, यदि मोदी ने अपने हर देशहित के कदम से पहले उसके बारे में प्रतिपक्ष को साथ लेकर उनकी सलाह को महतव् दिया तो वह प्रतिपक्ष के लिए हौंसला अफजाई होगा। क्योंकि मोदी के सामने तीन तलाक, देश में एक साथ चुनाव, आंतरिक व बाहरी चुनौतियां जैसे कई अहम मुद्दे हैं, साथ ही ‘न्यू इण्डिया’ के सपने को साकार करने की भी चुनौत्ी है ऐसे में यदि प्रतिपक्ष का पूर्ण सकारात्म्क सहयोग उन्हें प्राप्त हो जाता है तो फिरवे चनुौतियां अपने-आप खत्म हो जाती हैं, इसलिए अब प्रतिपक्ष से यह सरकार है कि या देश केा एक नया स्वरूप प्रदान करने की दिशा में मोदी को अपना अमूल्य योगदान प्रदान करें।
०-नया इंडिया के कालम ”न्यू इंडिया मंत्र” से साभार)
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