प्रदेश में जलसंकट की आहट

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। जिस प्रदेश में २००३ के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बिजली, पानी और सड़क के मुद्दे को लेकर सत्ता पर काबिज हुई हो और भाजपा खासकर शिवराज के शासनकाल में पानी की समस्या को लेकर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाये गये हों लेकिन शिवराज के १३ वर्षों के शासनकाल के बाद भी प्रदेश से पानी का संकट हल नहीं हुआ हो और आज १५ वर्षों बाद भी पानी की समस्या से आज भी प्रदेश जूझ रहा हो और प्रदेश के मुखिया कमलनाथ के छिंदवाड़ा जिले में तो वहीं प्रदेश के पीएचई मंत्री सुखदेव पासे के बैतूल जिले में शोले फिल्म की स्टाइल में धर्मेन्द्र की तर्ज पर बसंती नहीं बल्कि पानी की समस्या की ओर अपने जिले में रहने वाले मंत्री का ध्यान आकर्षित करने में लगा हुआ हो, ऐसे में सवाल यह उठता है कि आनेवाले लोकसभा चुनाव जो कि भीषण गर्मी के दौर में सम्पन्न होने वाले हैं ऐसे में पानी की समस्या को लेकर कहां-कहां मतदान की स्थिति बनती है यह तो आनेवाला भविष्य बतायेगा लेकिन यह जरूर है कि जिस झाबुआ-रतलाम के कांग्रेसी नेता कांतिलाल भूरिया ने भले ही अपने पुत्र की विधानसभा चुनाव में पराजय का ठीकरा भाजपा के वर्तमान विधायक और पूर्व लोक स्वास्थ्य यंत्री जीएस डामोर पर फोड़ते हुए उनके विभाग के कुछ अधिकारियों का विभाग में फेरबदल जरूर कर दिया लेकिन उसी संसदीय क्षेत्र में आने वाले अलीराजपुर में आज भी करोड़ों रुपये खर्च किये जाने के बावजूद फ्लोराइड युक्त पानी वह आदिवासीजन पीने को मजबूर हैं जिनके कांतिलाल भूरिया जनप्रतिनिधि हुआ करते हैं और इसी वर्ग के भरोसे झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र के इतिहास के हुए उपचुनाव के दौरान इन्हीं आदिवासियों के समर्थन के चलते भाजपा सरकार के तत्कालीन मंत्री और उनके मंत्रीमण्डल की फौज और लाव-लश्कर की रणनीति को निष्क्रिय कर मोदी लहर में हारे कांतिलाल भूरिया ने उपचुनाव में विजयश्री प्राप्त कर ली हो लेकिन अब इस लोकसभा चुनाव में ऐसा नजर नहीं आ रहा है कि वह चुनावी वेतरणी पार कर पाएंगे, क्योंकि भूरिया और उनकी टीम की जो कार्यशैली रही है उससे इस संसदीय क्षेत्र के मतदाताओं में अब भूरिया की साख गिरती जा रही है क्योंकि जिस तरह से अपने पुत्र की हार का ठीकरा जीएस डामोर पर फोड़ते हुए उन्होंने प्रदेश में कांग्रेसी सत्ता होने के चलते लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के मुखिया का फेरबदल कराने में तो सफलता प्राप्त कर ली लेकिन अलीराजपुर में जो आदिवासी फ्लोराइडयुक्त पानी वर्षों से पी रहे हैं, उससे मुक्ति दिलाने में इतनी सक्रियता भूरिया ने नहीं दिखाई यह स्थिति अकेले अलीराजपुर की नहीं बल्कि प्रदेश भर के कई जिलों की है जहां के ग्रामीण पानी के संकट से जूझ रहे हैं यह अलग बात है कि इस समस्या को बड़ी ही चतुराई से प्रदेश की पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे नगरीय क्षेत्र में में पानी की समस्या को बताकर जयवद्र्धन सिंह पर ढोलने का काम कर रहे हों और अपने आपको यह साबित करने की कोशिश करने में लगे हुए हों और यह दावा कर रहे हों कि मैं अभी भी क्षेत्र में हूँ और बराबर प्रदेश के जलसंकट पर मेरी नजर है तो वहीं इस तरह की समस्या के बारे में प्रश्न पूछने वाले को वह यह भी कहते नजर आते हैं कि यदि आपके संज्ञान में यदि इस तरह की समस्या आये तो हमें अवगत करायें मैं इसका तुरंत समाधान करने का प्रयास करूंगा। सवाल यह है कि विभाग में कांतिलाल भूरिया के चलते फेरबदल तो कर दिया गया लेकिन क्या इस समस्या से प्रदेश के उन ग्रामीणों की समस्या का समाधान हो जाएगा जिनका आधा समय पीने के पानी की जुगाड़ लगाने में लग जाता है और वह मीलों दूर चलकर एक-एक बूंद पानी को सहेजने में लगे रहते हैं। कुल मिलाकर प्रदेश इस समय भयंकर जल संकट से जूझ रहा है और आये दिन कहीं न कहीं इस समस्या से जूझ रहे लोगों की यह चेतावनी सुनने को मिल रहा है कि यदि पानी की समस्या का हल नहीं हुआ तो वह लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे। देखना अब यह है कि बदली हुई परिस्थितियों में प्रदेश में जल समस्या का समाधान किस प्रकार होता है, यह तो आने वाला समय ही बतायेगा?

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