प्रदेश के बुनकर और शिल्पी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश के सभी बुनकरों और शिल्पकारों ने न केवल शिल्प परम्परा को बचाया है बल्कि अपने नये कलात्मक सृजन से एक मिसाल प्रस्तुत की है। यह बात कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री अंतर सिंह आर्य ने आज समन्वय भवन में सिद्धहस्त शिल्पियों और बुनकरों को वर्ष 2014 से 2016 तक राज्य-स्तरीय कबीर बुनकर एवं राज्य स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार वितरित करते हुए कही। संत रविदास म.प्र. हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम अध्यक्ष नारायण प्रसाद कबीरपंथी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की।

मंत्री आर्य ने कहा कि राज्य सरकार बुनकरों और शिल्पकारों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कलाकार बन्धु को अपनी कृतियों में प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को उकेर कर प्रदेश का नाम रोशन करने लिये बधाई दी। मंत्री आर्य ने उपस्थित लोगों से आव्हान किया कि प्रधानमंत्री की मन की बात और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम दिल की बात को जरूर सुनें। आर्य ने बुनकर एवं शिल्पियों, जिन्हें पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है, द्वारा कलाकृतियों की डिजाइन और कलाकृतियों पर केन्द्रित स्मारिका का विमोचन किया। मंत्री श्री आर्य ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कलाकारों की कृतियों को सराहा।

कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री आर्य ने वर्ष 2016-17 का कबीर बुनकर प्रथम पुरस्कार छिन्दवाड़ा जिले के श्री चन्द्रशेखर कोल्हे को परम्परागत बुनाई कला को पुनर्जीवित कर सूती साड़ी निर्मित करने के लिये प्रदान किया। श्री कोल्हे ने एक्सट्रा वार्प का उपयोग कर डॉबी डिजाइन (ज्यामेट्रीकल) एवं एक्स्ट्रा वेफ्ट का उपयोग कर जाला डिजाइन बूटी एवं अड्डा बार्डर का उपयोग साड़ी निर्माण में किया है।

द्वितीय पुरस्कार गुना जिले के मुजफ्फर खाँ को चंदेरी साड़ी बनाने के लिए दिया गया। इस साड़ी में चंदेरी स्थित राजा-रानी महल पर लगी जालियों की डिजाइन का उपयोग किया गया है। तृतीय पुरस्कार गुना जिले के मैदान गली चंदेरी के निवासी बुनकर मकसूद खाँ को जैकार्ड मशीन द्वारा साड़ी की डिजायन बनाने के साथ बार्डर में जरी एवं पूना सिल्क (डिगम सिल्क) का उपयोग करने के लिये दिया गया।

प्रथम पुरस्कार विजेता को एक लाख रुपये, द्वितीय को 50 हजार एवं तृतीय पुरस्कार विजेता को 25 हजार रुपये की राशि और प्रमाण-पत्र प्रदान किये गये।

कार्यक्रम में वर्ष 2014 से 2016 तक के राज्य-स्तरीय विश्वकर्मा पुरस्कार विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। वर्ष 2014-15 के लिए शिल्पी डॉ. बलवीर तोमर (सीहोर) को प्रथम पुरस्कार, श्रीराम विश्वकर्मा (ग्वालियर) को द्वितीय, मोहम्मद वसीम (उज्जैन) को तृतीय एवं शिल्पी इस्केन्द्र गजभिए (छिन्दवाड़ा) को सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया।

वर्ष 2015-16 के लिए श्री देवकीनंदन बरगोतिया (ग्वालियर) को प्रथम पुरस्कार, श्री नानक माहौर (ग्वालियर) को द्वितीय, श्री शक्ति सिंह राजे (डबरा-ग्वालियर) एवं श्री मनीष गुप्ता (ग्वालियर) को संयुक्त रूप से तृतीय, श्री गौरव सांवलिया (इंदौर), श्री सतीश विश्वकर्मा (ग्वालियर) एवं सुश्री शोभा जैसवाल (इंदौर) को संयुक्त रूप से सांत्वना पुरस्कार दिया गया।

वर्ष 2016-17 के लिये श्रीमती गीतांजलि उर्वेती (भोपाल) को प्रथम, श्री सतीश विश्वकर्मा (ग्वालियर) को द्वितीय एवं श्री मोहम्मद नासिर (इंदौर) को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रथम पुरस्कार स्वरूप एक लाख रुपये, द्वितीय पुरस्कार 50 हजार, तृतीय पुरस्कार 25 हजार और प्रोत्साहन पुरस्कार के रूप में 15 हजार रुपये की राशि एवं प्रमाण-पत्र से शिल्पियों को सम्मानित किया गया।

आयुक्त हाथकरघा एवं हस्तशिल्प तथा संत रविदास म.प्र. हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम द्वारा प्रत्येक वर्ष चयनित बुनकर और शिल्पियों को यह पुरस्कार दिया जाता है। संचालक हाथकरघा एवं हस्तशिल्प सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने आभार माना।

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