प्रत्याशी चयन से चार कदम पीछे होती भाजपा

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०- देवदत्त दुबे
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। संगठन और मजबूत कैडर बेस पार्टी का दम भरने वाली भाजपा प्रत्याशी चयन में खोखला पन दिखाया है उससे पार्टी दो कदम आगे बढऩे की बजाय चार कदम पीछे जाती हुई दिखाई दे जगह-जगह पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ असंतोष पनप रहा है और डेमेज कंट्रोल के लिए भी कोई व्यवस्था कारगर होती दिखाई नहीं दे रही है। दरअसल पार्टी ने अभी तक जितने भी प्रत्याशी घोषित किए हैं उनमें से अधिकांश का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है और रविवार को घोषित प्रत्याशी में से खजुराहो सीट से घोषित किए गए विष्णु दत्त शर्मा का सोशल मीडिया जमकर विरोध हो रहा है यहां तक की पार्टी के पूर्व विधायक में इस्तीफा तक दें दिया है पार्टी को अभी भी सागर विदिशा भोपाल और इन्दौर जैसे पार्टी के गढ़ माने जाने वाले लोकसभा क्षेत्रों में मजबूत प्रत्याशी नहीं मिल पाए इससे पार्टी का माहौल बिगड़ रहा है कार्यकर्ताओं में भी निराशा छा रही है। पार्टी के नेताओं में विधानसभा चुनाव में हुए टिकट वितरण से लगता है कोई सबक नहीं सीखा है और लोकसभा चुनाव में भी एक के बाद एक ऐसी गलती है करती जा रही है और हालात यहां तक हो गए हैं कि किसी भी सीट पर केाई भी अब पक्के तौर पर जीत का दावा नहीं कर पा रहा । बहरहाल मध्यप्रदेश में पार्टी को एक और उम्मीद दिख रही है जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इन्दौर, विदिशा लोकसभा क्षेत्र लड़ाए जाने की चर्चा है और यदि ऐसा हेाता है तो प्रदेश में जरूर उत्साही माहौल बनेगा उससे टिकट वितरण से उत्पन्न हुई नाराजगी की दूर होने की संभावनाएं है लेकिन जब तक पार्टी भोपाल में मजबूत प्रत्याशी नहीं दे देती तब तक पूरे प्रदेश में माहौल बनाना पार्टी के लिए मुश्किल भरा काम है हालांकि पार्टी के रणनीति कार भी समझ गए और अपनी-अपनी चिंता जाहिर भी कर रहे सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा भोपाल सीट पर संघ को लगी है यही कारण है कि संघ ने जहां मजबूत प्रत्याशी के रूप में उमा भारती का नाम सुझाया है वहीं संघ के अनुषांगिक संगठनों से मोहल्ला स्तर पर बैठकें शुरू कर दी हैं रविवार को शहर में लगभग १०० स्थानों पर ऐसी बैठकें हुई जिसमें प्रत्याशी कोई भी हो भाजपा को जिताने के लिए घर घर जनसम्पर्क करने की रणनीति बनाई गई। पार्टी ने जितनी देरी प्रत्याशी चयन में की है उतनी ही उसकी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं अब जबकि चुनाव के लिएएक महीने से भी कम समय बचा है तब पार्टी प्रत्याशी का नाम घोषित ना होना चिंता का विषय है ही उससे भी ज्यादा चिंता उन सीटों की है जहां प्रत्याशियों का विरोध का सिलसला थम नहीं रहा है। स्थानीय समीकरण प्रत्याशी चयन के बाद बनने की बजाय बिगड़ गए जबकि कांग्रेस पार्टी ने टिकट वितरण में स्थानीय समीरणों में संतुलन बनाया हुआ है। प्रदेश की शेष पाँच सीटों पर आपकी पार्टी को ओबीसी ब्राह्मण जैन और महिला प्रत्याशयों को चयन करना है क्योंकि अभी तक पार्टी एक भी यादव को मिलवा नहीं बना पाई है तो पूरे देश में अभी तक जैन प्रत्याशी नहीं दे पाई इसी तरह २०१४ के लोकसभा चुनाव में जहां पांच ब्रह्मण प्रत्याशियों को ही टिकट मिला है यही हाल महिला प्रत्याशियों का है। कुल मिलाकर टिकट वितरण में पार्टी ने जिस तरह से असंतुलन पेदा कर लिया है उसकी भरपाई अब उसे पाँच सीटों में ही करना है जोकि मुश्किल भरा काम है शायद इसीलिए अब पार्टी शेष बची सीटों पर दिग्गज नेताओं को मैदान में उतारने के लिए गंभीरता से विचार कर रही है लेकिन भोपाल सीट से दिग्विजय सिंह का मुकाबला करने के लिए जिस तरह से उमा भारती और शिवराज सिंह चौहान बच रहे हैं उससे पार्टी की मुश्किल कैसे कम होगी, यह तो समय ही बताएगा लेकिन यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन्दौर या विदिशा से लोकसभा का चुनाव लड़ते हैं तो फिर जरूर टिकट वितरण की खामियों को दूर किया जा सकता है अन्यथा पार्टी अब सभी सीटों पर कड़े मुकाबले में फंस गई है।
०-नया इंडिया के कालम ”राजनैतिक गलियारा” से साभार)
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