पीएचई विभाग की अनदेखी से रसीदपुर में डायरिया का कहर जारी

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। पीएचई विभाग में दो राजनेताओं में छिड़ी जंग का लाभ उठाकर विभाग के मुखिया का पद पर विराजने वाले सीएस संकुले ने जबसे प्रमुख अभियंता का पद सभाला है तबसे लेकर आज तक विभाग में जनता की समस्याओं को लेकर अनदेखी का दौर जारी है जिसका खामियाजा पिछले दिनों गर्मी में पड़े भीषण जल संकट से जनता जूझती रही और विभाग के मुख्य अभियंता ही नहीं बल्कि उस विभाग के मंत्री सुखदेव पांसे आंकड़ेबाजी कर जल संकट दूर करने की घोषणा करते रहे। यदि विभाग द्वारा की गई आंकड़ेबाजी पर गौर करें तो प्रदेश के सत्ता के मुखिया कमलनाथ और विभाग के मंत्री पासे के जिलों की जनता को पानी की समस्या से जूझती रही और बैतूल जिले के जनप्रतिनिधि सुखदेव पांसे अपने विभाग के मुखिया के इशारे पर आंकड़ेबाजी का खेल खेलते रहे दूसरी ओर जनता पानी की समस्या से जूझती रही, लेकिन इसके बाद भी पीएचई विभाग में चल रही लापरवाही दूर नहीं हुई ओर अब बरसाती मौसम में प्रदेश के कई जिलों की आबादी डायरिया के प्रकोप की चपेट में है, पीएचई विभाग की अनदेखी का ताजा उदाहरण है राजधानी से सटे रायसेन जिले की तहसील गैरतगंज के रसीदपुर गांव में गंदा कुंए का पानी पीने से डायरिया फैल गया है। डायरिया के गत दिवस आठ और मरीज मिले हैं। मालूम हो कि यहां तीन दिन पहले दूषित पानी पीने से गांव के डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग उल्टीदस्त के शिकार हो गए थे। आठ व दूसरे दिन सुबह छह नये लोग उल्टी दस्त की शिकायत होने पर गैरतगंज अस्पताल इलाज कराने के लिए पहुंचे हैं। जिनका इलाज गैरतगंज अस्पताल में चल रहा है। यह पहला मौका नहीं है जब रसीदपुर गांव में इस तरह के हालात निर्मित हुए हैं। यहां हर साल बारिश के मौसम में जल स्त्रोत दूषित पानी उगलते हैं। ग्रामीणों की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग की कम्बेक्ट टीम एक बार फिर से रसीदपुर गांव पहुंची। प्रभावितों को प्राथमिक उपचार देने के बाद दोबारा गैरतगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया। मालूम हो कि रसीदपुर गांव के के ग्रामीणजनों द्वारा कुंए का गंदा पानी के सेवन के बाद तरह तरह की बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। तहसील मुख्यालय गैरतगंज से लगभग २० किमी की दूरी पर स्थित रसीदपुर गांव में तीन दिन पहले दूषित पानी पीने से गांव के डेढ़ दर्जन से अधिक लोग बीमार हो गए थे। इन लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती रखकर इलाज किया गया। जबकि कुछ लोग दूसरे शहरों में इलाज के लिए चले गए। पहले दिन बड़े पैमाने पर बीमारी फैलने की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों नें गांव में पहुंचकर लोगों का इलाज किया। पीएचई विभाग की टीमें भी गांव तो पहुंची। इसके बाद कुएं व हैण्डपम्पों का क्लोरीफिकेशन भी किया। परन्तु समस्या के समाधान के कोई प्रभावी कदम विभाग की तरफ से नहीं उठाए गए हैं। इतने बड़े पैमाने पर लोगों को डायरिया होने से स्वास्थ्य महकमा हरकत में आ गया। बीमार लोगों का इलाज किया गया। किन्तु गांव में कोई स्थाई कैम्प नहीं लगाए जाने से एक बार फिर इस बीमारी के मरीज सामने आ रहे हैं। मरीजों का इलाज कर रहे मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर नीलेश चौरसिया ने बताया कि दूषित पानी के सेवन से उक्त ग्रामीण इस बीमारी की चपेट में आए हैं। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। मरीजों एवं ग्रामीणों को उबला हुआ पानी ओआरएस का घोल मिलाकर सेवन करने एवं उचित खान पान की सामग्री लेेने की सलाह दी गई है। साथ ही उन्हें स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह भी दी गई है। मरीजों ने बताया कि गांव में पीने के पानी के सीमित संसाधन हैं। जिनका कोई रखरखाव सही तरह से शासन प्रशासन स्तर पर नहीं किया जा रहा है। जिसके चलते पेयजल स्त्रोतों का पानी दूषित हो चला है। परिणाम स्वरूप उन्हें गंदे पानी का उपयोग करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि इतने बड़े स्तर पर बीमारी फैलने के बाद भी शासन स्तर पर इसे हल्के में लिया गया है जिसके कारण चार दिन से हम लोग परेशान हैं। चौैथे व पांचवे दिन रसीदपुर के पृविी सिंह, जामवती, मोनिका, पार्वती, तुलसा बाई, बालमुकुंद, कविता एवं फूलसिंह आदिवासी के बीमार होने पर उन्हें गैरतगंज अस्पताल लाया गया है। इसके पूर्व डायरिया से ग्रसित लोगों में जानकी बाई ३० वर्ष, ओमप्रकाश २६ वर्ष, मालती बाई ३० वर्ष, जरीना बी ३५ वर्ष, मुन्ने खाँ ६० वर्ष, कमल बाई ६५ वर्ष, धर्मचंद ९० वर्ष, राकेश १५ वर्ष, मुंशीलाल ३६ वर्ष, कला बाई ५० वर्ष, शबाना २१ वर्ष,ज्ञान बाई ४५ वर्ष, शांति बाई ६० वर्ष, गुड्डी बाई ५० वर्ष, राज बाई ५० वर्ष, कविता बाई ३० वर्ष बीमार हुए थे। अब मरीजों का आंकड़ा ५० के आसपास पहुंचने का अनुमान है। ग्राम पंचायत सरपंच बैजनाथ यादव ने बताया कि रसीदपुर में १५० घरों पर ४०० लोगों की आबादी है। पानी की व्यवस्था पंचायत स्तर पर सीमित है। पीएचई विभाग को यहा पानी की व्यवस्था दुरुस्त कराने के लिए कई बार कहा जा चुका है। परन्तु पीएचई की टीम सिवाय खानापूर्ति के कुछ नहीं करती। जिसके कारण यह हालात बने हैं। इस बार स्थिति ज्यादा बिगड़ गई है। उन्होंने कहा कि पंचायत स्तर पर हम जितना कर सकते हैं कर रहे हैं।

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