धार के फूल छाप कांग्रेसियों को अपने भविष्य को लेकर सताने लगी चिंताएं

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मध्यप्रदेश में विगत १५ वर्षों से सत्ता का वनवास भोग रही कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं के सामने जहां सत्ता के वनवास को खत्म करने की जद्दोजहद चल रही है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश में उन फूल छाप कांग्रेसियों में जो विगत १५ वर्षों में प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव, उपचुनाव के साथ-साथ नगरीय निकाय व पंचायतों के चुनाव में अभी तक भाजपाई नेताओं को पर्दे के पीछे सहयोग कर अपने राजनैतिक वर्चस्व को कायम बनाये रखा उन्हीं फूल छाप कांगे्रसियों में इस समय अपने भविष्य को लेकर चिंता की लकीरें खिंचने लगी हैं और वह यह सोचकर परेशान हैं कि यदि प्रदेश में जिस तरह का माहौल भाजपा के खिलाफ बन रहा है यदि धोखे से भी वह माहौल प्रदेश के मतदाताओं ने कांग्रेस के पक्ष में परिवर्तित कर डाला तो फिर उन फूलछाप कांग्रेसियों के भविष्य का क्या होगा क्योंकि वह अभी तक तो पर्दे के पीछे भाजपा के साथ गलबहियां डालने का खेल खेलकर अपनी राजनीति चमकाते रहे ऐसा ही कुछ इन दिनों धार जिले में फूल छाप कांग्रेसियों में नजर आ रहा है और इससे घबराकर इन फूलछाप कांग्रेसियों ने जिले के कद्दावर नेता रहे मोहन सिंह बुंदेला उर्फ (पेलवान) की अभी तक ताक तूती बोलती रही थी धार में बुंदेला गुट का खौफ व आतंक इतना था कि इसी आतंक के चलते बालमुकुन्द गौतम जैसे कारोबारी और कद्दावर नेता से शीतयुद्ध का दौर चलता रहा और कांगे्रसियों की इसी आपसी वर्चस्व की लड़ाई के चलते अभी तक वह विक्रम वर्मा जिन्होंने धार जिले की राजनीति में अपने वर्चस्व बनाने के लिये कभी इस तरह का बयान देकर कि स्वर्गीय कुशाभाऊ ठाकरे की जन्मभूमि पर हम शराब की एक बूंद नहीं बिकने देंगे, अपनी राजनैतिक बिसात बिछाने की पहल की तो कभी मालवा की अयोध्या भोजशाला के विवाद को उछालकर अपनी राजनीति चमकाते रहे लेकिन शिवराज सिंह के कार्यकाल में भोजशाला मामले को लेकर उठे बवाल के दौरान तत्कालीन आईजी अनुराधा शंकर के द्वारा जब हिन्दू संगठन से जुड़े नेता धार की सड़कों पर पुलिस की पिटाई झेल रहे थे तो उस समय विक्रम वर्मा और उनकी विधायक धर्मपत्नी धार से गायब होने को लेकर धार सहित पूरे जिले के हिन्दू संगठनों में विक्रम वर्मा और नीना वर्मा के खिलाफ आक्रोश पनप रहा है अभी तक तो विक्रम वर्मा जिले के फूलछाप कांग्रेसियों की मदद से अपनी धर्मपत्नी को लोकतंत्र की प्रक्रिया मतदाताओं के मतों से नहीं डाक मतपत्रों से विजयश्री दिलवाते रहे हैं, लेकिन अब जब जिले के फूलछाप कांग्रेसियों में अपने भविष्य को लेकर चिंता व्याप्त है तो ऐसे में जिले में इस तरह की चर्चा का दौर जारी है कि इस बार के चुनाव में भी क्या यह फूलछाप कांग्रेसी बालमुकुन्द गौतम की धर्मपत्नी श्रीमती प्रभा गौतम के साथ भी वही रणनीति अपनायेंगे जो बालमुकुन्द गौतम के साथ अपनाते रहे हैं। हालांकि जिले की राजनीति से जुड़ा हर व्यक्ति जानता है कि धार में अभी तक उन नीना वर्मा के पति विक्रम वर्मा जिन्होंने अपने नेता प्रतिपक्ष के कार्यकाल के दौरान दिग्विजय सिंह की सरकार में सत्ता की कितनी चाशनी चखी तो वहीं दिग्विजय सिंह को स्वर्गीय सुन्दरलाल पटवा सहित भाजपा के अन्य नेताओं के साथ-साथ मिस्टर बंटाढार के नाम से संबोधित करने वाले विक्रम वर्मा सहित स्वर्गीय सुन्दरलाल पटवा ने न्यायालय में दिग्विजय सिंह को ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ नेता होने का तो लिखकर दिया ही था तो वहीं उन्होंने न्यायालय में यह भी लिखा था कि उन्होंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया। विक्रम वर्मा द्वारा न्यायालय में दिग्विजय सिंह को इस तरह से निष्ठावान और ईमानदार नेता बताने के पीछे क्या कारण थे, यह भी प्रदेश की राजनीति से जुड़ा हर व्यक्ति जानता है कि जब प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार थी तो भाजपा के नेता उस कांग्रेसी सरकार का किस तरह से सत्ता का सुख भोग रहे थे, तो वहीं शिवराज मंत्रीमण्डल में राज्यमंत्री विश्वास सारंग और उनके पिताश्री कैलाश सारंग दिग्विजय सिंह के निवास सीएम हाउस में अक्सर देखे जाते थे। यही वजह रही कि उस समय भाजपा को भाजपा-डी (दिग्विजय सिंह) के नाम से प्रदेश की राजनीति में चर्चा जोरों पर थी। उन्हीं विक्रम वर्मा की धर्मपत्नी पिछले विधानसभा चुनावों में डाकमतों से विजयश्री प्राप्त करने वाली नीना वर्मा अब पुन: चुनावी समर में हैं उनका मुकाबला अबकी बार बालमुकुन्द गौतम से नहीं बल्कि उनकी धर्मपत्नी श्रीमती प्रभा गौतम से है तो वहीं जिले में यह भी चर्चा का दौर जारी है कि धार जिले के किस भाजपा उम्मीदवार को पीथमपुर के एक उद्योगपति ने चार करोड़ रुपये का टिकट खरीदकर नवाजा लोग उस उद्योगपति और उस भाजपा प्रत्याशी की खोज में भी लगे हुए हैं? तो वहीं उन फूलछाप कांग्रेसियों में भी अपने राजनैतिक भविष्य को लेकर यह चिंता व्याप्त है कि यदि कहीं धोखे से प्रदेश के मतदाताओं ने भाजपा को सत्ता से बेदखल कर कांग्रेस को सत्ता पर काबिज कर दिया तो उन फूलछाप कांग्रेसियों का भविष्य क्या होगा जो अभी तक पर्दे के पीछे रहकर भाजपाई नेताओं को बल देते रहे इन्हीं सब मुद्दों को लेकर जिले के एक कद्दावर नेता के फार्म हाउस पर हुई बैठक को लेकर इन दिनों चर्चाओं का दौर जारी है और लोग उस बैठक के तरह-तरह के मायने निकालकर उस बैठक को लेकर चटकारे लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं।

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