दिल में उम्मीदें, पर झोली खाली … !

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०-ओमप्रकाश मेहता
मध्यप्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ पिछली शिवराज सरकार की ‘ऋणम धृत्वा, भूतम, पीबेत’ (कर्ज लो ओर घी पियो) की विरासत में मिली नीति में काफी परेशान हैं। यद्यपि उन्होंने अपनी सरकार का पहला बजट तो प्रस्तुत कर दिया, किन्तु उन्हें इस बात का बेहद अफसोस रहा कि राज्य की आर्थिक स्थिति और कर्ज की भारी मात्रा के कारण वे जनकल्याण व विकास को अपनी उम्मीदें पूरी नहीं कर पा रहे हैं। प्रदेश की जनता के प्रति सद्भावना का ताजा और सबसे अहम उदाहरण तो यह है कि प्रदेश की विषम आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने अपने नए बजट में जनता के किसी भी वर्ग पर कोई कर का बोझ नहीं डाला और अपने सीमित बजट में ‘सर्वजन सुखाय, सर्वजन हिताय’ की ही बात की। मध्यप्रदेश में पिछले पन्द्रह वर्षों से भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और इन पन्द्रह वर्षों में लगभग तेरह वर्ष शिवराज सिंह ही मुख्यमंत्री रहे, और उनका हर बजट प्रदेश की आर्थिक स्थिति का आईना सिद्ध हुआ। हर साल उन्हें कर्ज लेना पड़ा और यह कर्ज पन्द्रह साल में डेढ़ लाख करोड़ तक पहुंच गया। इसके बाद जब सात माह पूर्व प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी तो उसे पिछली सरकार से विरासत में डेढ़ लाख करोड़ का कर्ज भी मिला। अब कमलनाथ के सामने सबसे बड़ी परेशानी किसानों के कर्ज चुकाने का वादा और शिक्षित युवाओं को रेाजगार मुहैया कराने की थी, जिसपर उन्होंने अपने तरीके सेू अमल किया। फिलहाल इस सरकार को केवल सात माह अर्थात करीब दो सौ दिन का समय मिला है। इस बीच सरकार के सामने जनहित व जनकल्याण का बजट प्रस्तुत करने की अहम जिम्मेदारी आ गई। अत: सरकार को बिना आगा-पीछे सोचे ऐसा बजट प्रस्तुत करने को अघत होना पड़ा, जो सरकार के लिए आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला था, फिर भी इस बजट की सबसे अहम बात तो यह कि बिना कोई नया कर थोपे सरकार ने जनता के हर वर्ग के कल्याण व उनकी मुसीबतें हल करने का विशेष ध्यान खासकर किसानों व युवाओं का। किसानों का कृषि बजट में जहां ६६ फीसदी की वृद्धि कर उसे ४६ हजार ५९९ करोड़ का कर दिया गया वहीं किसानों की कर्ज माफी के लिए आठ हजार करोड़ की राशि सुरक्षित रखी गई। साथ ही प्रदेश में स्थापित होने वाले उद्योगों में प्रदेश के शिक्षित बेरोजगारों से सत्तर फीसदी नौकरियां देनरे का भी सख्त आदेश पारित कर दिया गया। बजट में ग्रामीण विकास हेतु १७,१८६ करोड़ स्कूली शिक्षा के लिए २४,४९९ करोड़ राज्य में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने हेतु उसकी बजट राशि में ३२ फीसदी की वृद्धि। इस प्रकार कुल दो लाख चौदह हजार ८५ करोड़ का राज्य का नया बजट प्रस्तुत किया गया। वह भी तब जब केन्द्र की मोदी सरकार ने प्रदेश के हिस्से के २,७०० करोड़ रुपए की राशि का भुगतान नहीं किया। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौति बिना किसी विशेष आय के प्रदेश के सपनों में रंग माना ळै, इसके लिए सरकार ने सामाजिक कुरीतियों से जुड़ी ऐश-ओ-आराम की वस्तुओं पर अधिद्यभारल गाकर पैसा जुटाने का रास्ता खोजा है, जिसमें सबसे पहले क्रम पर शराब है। इसकी एक्साइज ड्यूटी में ३,५००० करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद स्टाम्प ड्यूटी के तहत प्रॉपर्टी रजिस्ट्री शुल्क दो फीसदी बढ़ा दिया, इससे बारह सौ करोड़ की अतिरिक्त आय होगी। इसी तरह यात्री वाहनों के प्रति सीट लिए जाने वाले टैक्स में वृद्धि कर उससे तीन हजार करोड़ की आय का लक्ष्य निर्धारित किया गया, जो अभी तक २६९१ करोड़ था। इसी तरह ईंधन (पेट्रोल, डीजल) माइनिंग (खनिज) आदि के माध्यमों से भी सरकार का आर्थिक बोझ कम करने का प्रयास किया गया। ये सब तो आर्थिक संसाधन खेाजे गए पर सरकार ने अपने प्रयासों से प्रदेश के आम गरीब व मध्यम वर्ग के साथ किसान व युवा महिला वर्ग की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। यद्यपि इतने सब प्रयासों के बावजूद एक वर्ष में प्रदेश सरकार पर २८ हजार करोड़ रुपए का कर्ज बढ़ जाने का अनुमान है, किन्तु सरकार का भी मजबूरीपूर्ण दायित्व है कि वह अपनी असुविधाओं को नजर अंदाज कर प्रदेशवासियों के कल्याण व विकास का विशेष ध्यान रखे, वहीं कमलनाथ सरकार करने जा रही है। इस सरकार के दिल में उम्मीदें तो अनंत हैं, किंतु झोली खाली होने के बाद अहसास भी है। केन्द्र में अपने दल की सरकार नहीं होना भी राज्य सरकार की सबेस बड़ी चुनौती है।
०-नया इंडिया के कालम ”जितना बजट, उतना ही कर्ज” से साभार)
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