दिल्ली मेें विपक्षी पार्टियों का डेरा

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। सुदूर दक्षिण और पूर्वी भारत की पार्टियां अपना आंदोलन लेकर दिल्ली पहुंच रही हैं। विपक्षी गठबंधन में नेता बनने की चाह में सारी प्रादेशिक पार्टियों के नेता दिल्ली में अपने कार्यक्रम करने जा रहे हैं ताकि उस पर देश भर का फोकस बने और साथ ही दूसरी विपक्षी पार्टियों की अपने पीछे खड़ा किया जा सके। अपने राज्य में भी अगर उनका आंदोलन होता है तो उसके पीछे भी मकसद विपक्षी पार्टियों को अपने साथ लाना होता है। जैसे कि ममता बनर्जी ने पिछले महीने रैली करके या पिछले हफ्ते प्रदर्शन करके किया। अम ममता बनर्जी दिल्ली आ रही हैं। वे १३ और १४ तारीख को दिल्ली में प्रदर्शन करेंगी। केन्द्र सरकार पर प्रादेशिक पार्टियों को दबाने और केकन्द्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग का मुद्दा बना कर दिल्ली में धरने पर बैठेंगी। पिछले रविवार को कोलकाता में उनके धरने के दौरान कई पार्टियों के नेता पहुंचे और उसमें शामिल हुए। जो नहीं पहुुंचे उन्होंने फोन करके ममता के धरने का समर्थन किया, जैसे राहुल गांधी और मायावती ने किया। अबउनको लग रहा है कि दिल्ली में उन्होंने धरना दिया तो ज्यादा से ज्यादा विपक्षी पार्टियां उसमें शामिल होंगी। उनसे पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू दिल्ली में धरना देने जा रहे हैं। वे सोमवार को अनशन करेंगे। राष्ट्रीय के साथ-साथ उनका एजेंडा प्रादेशिक भी है क्योंकिउनके राज्य में लोकसभा के साथ ही विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। इसलिए उन्होंने आंध्र प्रदेश केक साथ केन्द्र सरकार के कथित सौतेले व्यवहार का मुद्दा बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने आंध्र कि हितों की अनदेखी की। उन्होंने धरने के लिए सोमवार का दिन इसलिए भी चुनाव क्योंकि रविवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को उनके राज्य सहित दक्षिण के तीन राज्यों में रैली करनी थी। संसद सत्र के दौरान दिल्ली में प्रदर्शन का फायदा यह होता है कि भीड़ जुट जाती है और अटेंशन मिल जाता है।
०-नया इंडिया के कालम ”राजरंग” से साभार)
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