ज्योतिरादित्य और कांग्रेस की दिशा और दशा तय करेंगे उपचुनाव

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0- अरुण पटेल

प्रदेश में हो रहे कोलारस और मुंगावली उपचुनाव शनै-शनै दिलचस्प मोड पर पहुंच रहे हैं, क्योंकि सत्ताधारी दल भाजपा और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इन्हें फतेह करने के लिए अपनी पूरी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है। इन चुनावों को दोनों ही दल 2018 के विधानसभा चुनावों का सेमी फाइनल मानकर चल रहे हैं, क्योंकि दोनों को यकीन है कि जो भी इन चुनावों को जीतेगा उसकी 2018 की राह अधिक आसान हो जाएगी। भाजपा की तुलना में यहां कांग्रेस की प्रतिष्ठा ज्यादा दांव पर लगी है, क्योंकि दोनों ही सीटों पर न केवल कांग्रेस का कब्जा है बल्कि यह सीटें 2013 के विधानसभा चुनाव में 20-20 हजार से अधिक मतों के अंतर से कांग्रेस ने जीतीं थी। प्रत्याशियों के चेहरों के स्थान पर यह चुनाव पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए इसलिए महत्वपूर्ण हो गया है, क्योंकि वे इसे खुद की प्रतिष्ठा मानकर लड़ रहे हैं। उपचुनाव के नतीजे एक तरह से प्रदेश में कांग्रेस और ज्योतिरादित्य सिंधिया की दिशा और दशा तय करने वाले होंगे। कांग्रेस ने सिंधिया से काफी उम्मीदें लगा रखीं हैं, और उनकी बनाई रणनीति के तहत कांग्रेस ने एकजुटता से चुनाव जीतने की ललक लेकर चुनावी समर में डटे हैं।
इन सीटों में से यदि कांग्रेस एक भी हारती है तो 2018 का विधानसभा चुनाव जीतने का जो सपना संजों रखा है उसे साकार करना आसान नहीं होगा। भाजपा ने पूरी ताकत इस उपचुनाव में इस बात में लगा रखी है कि न केवल वह हार-जीत के मार्जिन को कम करे, बल्कि कम से कम एक सीट कांग्रेस की झोली से खींचने में सफल हो। यही कारण है कि आरंभ में कांग्रेस के पक्ष में एक तरफा दिख रहा चुनाव जैसे-जैसे मतदान की तिथि नजदीक आ रही है वैसे-वैसे कड़े चुनावी मुकाबले में तब्दील होता जा रहा है। चुनाव परिणामों से ही यह पता चल सकेगा कि सिंधिया के गढ़ में सेंध लगाने में शिवराज कितने सफल हो पाए हैं?
जहां तक हार-जीत के दावे का सवाल है हर दल अपनी जीत के दावे करता है लेकिन आपसी बातचीत में जहां कांग्रेस के नेता दोनों सीटों को भारी अंतर से जीतने का दावा कर रहे हैं तो वहीं भाजपा नेताओं का दावा है कि पिछले उपचुनाव के मुकाबले एक तो जीत-हार का अंतर कम होगा और कम से कम एक सीट वह कांग्रेस से छीनने जा रही है। सिंधिया के व्यक्तिगत प्रभाव और उनके बूथ स्तर तक के माइक्रो मैनेजमेंट को देखते हुए कांग्रेस का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। अंतिम चरण में भाजपा जब अपने पूरे लाव-लश्कर और संगठनात्मक क्षमता के साथ सक्रिय हुई है, इसके बाद जो नतीजे आएंगे उससे इस बात का सही आंकलन हो पाएगा कि सिंधिया के बूथ स्तर के माइक्रो मैनेजमेंट पर भाजपा की रणनीति भारी पड़ती है या नहीं? भाजपा ने इन उपचुनावों में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ ही केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और राज्य सरकार के 17 मंत्रियों सहित बड़ी संख्या में विधायकों को चुनाव प्रचार अभियान में लगा रखा है। कोलारस विधानसभा उपचुनाव की कमान शिवराज ने यशोधरा राजे सिंधिया को सौंप दी है। उधर कांग्रेस ने यह चुनाव पूरी जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य को दे रखी है। कांग्रेस एकजुटता से चुनाव लड़ रही है इसकी बानगी उस समय देखने को मिली जब दोनों ही क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों के नामांकन के मौके पर कांग्रेस के सभी बड़े नेता एकसाथ दिखाई दिए, उन्होंने रोड शो किया और उम्मीदवारों के पर्चे दाखिल कराए। इसमें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव दीपक बावरिया, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, सुरेश पचौरी, अरुण यादव और अजय सिंह आदि एकसाथ नजर आए और रोड शो किया। कांग्रेस ने यहां पर अपने लगभग ढाई दर्जन विधायकों को भी चुनाव प्रचार अभियान में लगा रखा है। इसके साथ ही ज्योतिरादित्य ने दिग्विजय सिंह के कट्टर समर्थक एवं पूर्व मंत्री केपी सिंह को कांग्रेस का चुनाव प्रभारी बनाया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया 15 फरवरी से दोनों क्षेत्रों में डटे हुए है, और वे 22 फरवरी तक यहीं रहेंगे। अनुसूचित जनजाति और समाज के कमजोर तबकों के बीच उनके साथ विधायक दल के उपनेता बाला बच्चन भी सक्रिय हैं। अरुण यादव भी उपचुनाव के सिलसिले में अपनी आमद दे चुके हैं, और अब चुनाव प्रचार समाप्ति तक दोनों ही क्षेत्रों में अपना डेरा जमाए रखेंगें। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी 19-20 फरवरी को मुंगावली और कोलारस में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे। जबकि कांग्रेस सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी पहले ही मुंगावली एवं कोलारस में अपनी आमद दर्ज करा चुके है। जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी शीघ्र ही पहुंचने वाले हैं। चुनाव प्रचार अभियान के अंतिम दिन भी कांग्रेस की योजना दोनों ही उपचुनावों में एक मेगा रोड शो करने की है, जिसमें कमलनाथ और सिंधिया सहित कांग्रेस के सभी बड़े नेता भाग लेंगे और इसके साथ ही प्रचार अभियान शाम 5 बजे थम जाएगा।
वैसे तो यह उपचुनाव विकास और शिवराज की सामाजिक सरोकारों से जुड़ी योजनाओं के सहारे भाजपा लड़ रही है तो वहीं किसानों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों और अन्य तबकों में जो असंतोष है उसे उभारकर कांग्रेस भाजपा की घेराबंदी कर रही है। दोनों ही पार्टियों में इस बात की होड़ लगी हुई है कि दोनों ही खुद को किसी भी सूरत में आम जनता का शुभचिंतक साबित किया जाए। चुनाव एक प्रकार से शिवराज और ज्योतिरादित्य के इर्द-गिर्द इस मायने में सिमट कर रह गया है कि दोनों ही एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। कांग्रेस ने भले ही अभी कोई चेहरा घोषित नहीं किया हो लेकिन भाजपा और शिवराज ने यह मान लिया है कि अगले चुनाव में कांग्रेस का चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया ही होेंगे। इसलिए वह ज्योतिरादित्य के लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गढ़ में सेंध लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ने वाले हैं। शिवराज ने पिछले दिनों सोशल मीडिया पर ट्ववीट कर ज्योतिरादित्य को निशाने पर लिया और कहा कि जनता का भला सोचना राजा और महाराजाओं के बस की बात नहीं है। ऐसा कहकर उन्होंने एक साथ दो निशाने ज्योतिरादित्य और दिग्जिवय सिंह पर साधे है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह इन दिनों राजनीति से दूर नर्मदा की अध्यात्मिक पैदल परिक्रमा में व्यस्त हैं। राजे महाराजे शिवराज के निशाने पर है तो कोलारस में भाजपा ने भी एक प्रकार से सिंधिया राज घराने की यशोधरा राजे को आगे कर दिया है। इस ट्वीट के परिप्रेक्ष्य में सोचने की बात यही है कि यशोधरा जनता का भला किस सीमा तक सोच पाएंगी। चुनावी सभाओं में शिवराज ज्योतिरादित्य पर निशाना साधते हुए यह बात भी जोर-शोर से कह रहे है कि इस अंचल में पेयजल और कुपोषण की समस्या का समाधान महाराजा नहीं करा पाएं।
ज्योतिरादित्य अपनी चुनावी सभाओं में किसानों का मुद्दा उठाने से नहीं चूकते और वे शिवराज सरकार पर किसानों को दंडित करने का आरोप लगाते हुए सरकार को हर मोर्चे पर विफल निरुपित कर रहे हैं। भाजपा की चुनावी रणनीति और मुख्यमंत्री तथा मंत्रियों की सक्रियता पर तंज कसते हुए ज्योतिरादित्य कहते हैं कि चार माह से मुंगावली और कोलारस ही राज्य की राजधानी बने हुए है। जिस तरह से मुख्यमंत्री और मंत्री यहां ढेरा डाले रहते हैं उसे देखकर लगता है कि चुनाव कुछ और देर से होते तो शायद प्रदेश का सचिवालय वल्लभ भवन भी यहां आ जाता। पिछले पांच वर्षों में इन क्षेत्रों में यहां विकास का कोई काम नहीं हुआ इसे रेखांकित करते हुए शिवराज मतदाताओं को भरोसा दिला रहे है कि पांच माह का समय मतदाता दे दें तो पांच साल के विकास को पूरा कर देंगे। जबकि केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर दोनों उपचुनाव में भाजपा की जीत का दावा कर रहे हैं और कह रहे है कि इन उपचुनावों के नतीजों पर सत्त्ता विरोधी लहर का कोई असर नहीं पड़ेगा और दोनों ही सीटें भाजपा जीतेगी। अब चुनाव नतीजों से ही यह पता चल पाएगा कि किसके दावे में कितना दम था।
0- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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