जिस सरकार में इतने अंतर्विरोध, वो कैसे करेगी प्रदेश का विकास: विष्णुदत्त शर्मा

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। कमलनाथ सरकार में पहले इस बात पर खींचतान मची थी कि मंत्रिमंडल में किसे लिया जाए और किसे नहीं। जैसे-तैसे हाईकमान के हस्तक्षेप से यह मामला सुलझा, तो अब मंत्रियों को विभागों के आवंटन की गुत्थी उलझ गई है। मुख्यमंत्री यह तय ही नहीं कर पा रहे हैं कि किस मंत्री को कौन-सा विभाग देना चाहिए। जिस सरकार में पग-पग पर इतने अंतर्विरोध सामने आ रहे हों, वह प्रदेश का विकास कैसे करेगी? यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री विष्णुदत्त शर्मा ने कमलनाथ मंत्रिमंडल में शामिल मंत्रियों को विभागों के आवंटन में हो रही देरी पर प्रतिक्रिया जताते हुए कही।

विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि कांग्रेस की सरकार बनते ही पार्टी और सरकार में असंतोष सामने आने लगा है। काफी लंबी जद्दोजहद के बावजूद मुख्यमंत्री कमलनाथ जब अपने मंत्रियों नाम फाइनल नहीं कर पाए, तो उन्होंने गेंद हाईकमान के पाले में डाल दी। हाईकमान की सहमति से नाम तय होने के बावजूद मंत्रिपद के जिन दावेदारों को कैबिनेट में जगह नहीं मिली, वे विरोध कर रहे हैं और धमकी दे रहे हैं। सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय, सपा और बसपा के विधायक भी मंत्रिपद न मिलने पर नाराज हैं। जैसे-तैसे मंत्रिमंडल ने शपथ ग्रहण की, तो अब मंत्रियों को विभाग बांटने में वही परेशानी आ रही है। कुछ मंत्री अड़े हुए हैं कि उन्हें तो उनका मनपसंद मंत्रालय ही चाहिए। इसके चलते शपथग्रहण के तीन दिन बाद भी विभाग तय नहीं हो पा रहे हैं, जिससे सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है। अब सुना है कि इस मामले को भी हाईकमान को ‘रेफर’ किया जा रहा है। विष्णुदत्त शर्मा ने प्रश्न किया कि जो सरकार अपने अंतर्विरोधों के आगे इतनी विवश है, वह प्रदेश का विकास कब और कैसे करेगी ? शर्मा ने कहा कि अपने मनचाहे विभाग के लिए मंत्रियों की जिद को देखते हुए यह साफ हो गया है कि कांग्रेस के नेताओं के लिए जनता की सेवा महत्वपूर्ण नहीं है, उनके लिए वह पद ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिस पर बैठकर वह अपनी हुकूमत चला सकें।

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