घर के सारे बदल डालें की तरह पुलिस अधिकारियों के स्थानान्तरण के पीछे बढ़ता अपराध तो नहीं ?

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश में लगभग दो महीने पूर्व कांग्रेस के सत्ता पर काबिज होते ही अचानक प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति क्यों बिगड़ी इसको लेकर सब दूर चिंता का वातावरण है तो वहीं प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष सरकार को आड़े हाथों ले रहा है, इन लगभग दो महीनों में भले ही मन्दसौर, इन्दौर और रतलाम में जो हत्याएं हुई थीं भले ही उसके पीछे शासन ने इसे भाजपा की आपसी लेनदेन और वर्चस्व की लड़ाई बताया था तो वहीं रतलाम की घटना को संघ से जुड़े भाजपा के नेता द्वारा बीमा की राशि से जोड़ दिया हो लेकिन कांग्रेस के सत्ता पर काबिज होते ही प्रदेश में सभी प्रकार के अपराध में अचानक चिंताजनक उछाल आया है, मामूली अपराधों को यदि दरकिनार कर दिया जाये तो लेकिन हत्या, लूट, अपहरण और बलात्कार के साथ-साथ रेत माफियाओं द्वारा वारदातें करने की अनेकों घटनाओं को कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है कांग्रेस शासन के आते ही बीते करीब दो माह में दिन दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दिये जाने, बंदूक की नोंक पर अपहरण कर लिये जाने सहित ऐसी अनेकों वारदातें घटित हो चुकी हैं जो प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती आ रही है मजे की बात यह है कि इन सब घटनाओं के बावजूद भी शासन और प्रशासन गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। जानकार इसके पीछे घर के सारे बदल डालूं की तर्ज पर अधिकांश पुलिस अधिकारियों का स्थानान्तरण किये जाने की बात कर रहे हैं, भारी संख्या में पुलिस अधिकारियो के स्थानान्तरण हुए हैं, वहां उनकी भौगोलिक स्थिति का ज्ञान नहीं है और जिन अधिकारियों की पकड़ अपने क्षेत्र में थी उनके एक के बाद एक स्थानान्तरण होने से वह पकड़ खत्म हो गई, नई जगह स्थानान्तरण होने से अब उन्हें पकड़ बनाने में देर लगेगी इसका लाभ अपराधी उठा रहे हैं। किंतु अभी हाल ही में चित्रकूट की यह घटना बहुत ही गंभीर है क्योंकि अपहरणकर्ता स्कूल बस में बैठे बच्चों के संरक्षक और ड्रायवर को बंदूक दिखाकर दो जुड़वा बच्चों की दिनदहाड़े अपहृत कर गए। इसी तरह हाल ही में इंदौर के एक बच्चे अक्षत का अपहरण हुआ था, जिसे बाद में सागर से सुरक्षित बचा लिया। कुछ दिन पूर्व झाबुआ में भी एक युवक का अपहरण हुआ था, जिसे बाद में सागर से सुरक्षित बचा लिया गया। कुछ दिन पूर्व झाबुआ में भी एक युवक का अपहरण हुआ और उसके परिवार से बीस लाख रुपए की फिरौती मांगी गई। क्या ये घटनाएं प्रदेश में अपहरण उद्योग के फिर सिर उठाने के संकेत हैं? क्या सरकार बदलते ही अपराधियों के हौंसले इतने बुलंद हो गए हैं कि महज दो महीने में उनके अंदर से पुलिस का खौफ जाता रहा? मुरैना जिले में रेत-माफिया एक ट्रैक्टर-ट्रॉली ने पुलिस वाहन को ही टक्कर मारी है। प्रतिपक्ष का आरोप है कि सरकार पुलिस व प्रशासनव के तबादले में इतनी व्यस्त है कि उसे दैनंदिनी शांति व्यवस्था तक की चिंता नहीं रही। लगातार हो रही गंभीर घटनाएं इस आरोप की पुष्टि भी करती हैं। इधर, सततापक्ष का कथन है कि ऐसी घटनाएं तो पिछली सरकार के दौरान भी होती रही हैं। तो क्या इस कुतर्क के आधार पर अपराध होने देने की छूट दी जा सकती है? यथार्थत: यह विषय राजनीतिक करने का नहीं है। जनता ने ‘वक्त है बदलाव काÓ नारे के समर्थन में वोट दिए थे। अत: वह नई सरकार की कार्यशैली में बदलाव की अपेक्षा करती है। राजनीतिक नेतृत्व भले ही नया हो, किंतु प्रशासन-तंत्र तो वही पुराना अनुभवी है। फिर स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा है?

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