गति अवरोधक को पार करने के बाद सरकार ने पकड़ी रफ्तार

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०- देवदत्त दुबे
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। ११ दिसम्बर को जब मतगणना चल रही थी तब शाम को एक स्थिर टेबल चल रही थी जिसमें कांग्रेस और भाजपा की सीटों में ज्यादा अंतर नहीं दिखाई दे रहा था। तभी समझ में आ गया था कि आने वाली सरकार को बनने के लिए जोड़-तोड़ की जरूरत पड़ेगी और कांग्रेस, भाजपा की अपेक्षा सीटें तो जरूर ज्यादा लाई लेकिन बहुमत से कम थी। इस कारण चार निर्दलीय दो बसपा और एक सपा के सहयोग से सरकार बना ली। मुख्यमंत्री चयन कर लिया। इसके थोड़े दिन बाद मंत्रिमण्डल का गठन कर लिया। बाद में विभागों का वितरण और आज मंत्रियों को जिलों का प्रभार भी दे दिया। इसके पहले चार दिन का शीतकालीन सत्र पूरा हो गया, जिसमें अध्यक्ष और उपाध्यक्ष भी निर्वाचित हो गए। कुल मिलाकर सरकार ने जो शुरुआती गति अवरोधक थे वह पार कर लिए हैं और अब सरकार को रफ्तार देने की कोशिशें तेज हो गई। मंत्रियों का प्रभार वाले जिलों में आने जाने में समय बर्बाद ना हो इस कारण अधिकांश मंत्रियों को आसपास के जिलों का ही प्रभार दिया गया है, जबकि भाजपा शासनकाल में मंत्रियों को बहुत दूर-दूर जिलों के प्रभार दिए गए थे और जिसके बाद शिकायतें मिलती थीं कि मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में या तो आते नहीं हैं और आते हैं तो फिर रात्रि में विश्राम नहीं करते। शायद पूर्ववर्ती सरकार कोई छोटी-मोटी गलतियों को सुधार कर नई सरकार कदम उठा रही है। पिछली सरकार में आरोप था कि मंत्री पार्टी कार्यालय में नहीं आते, आते भी हैं तो कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं नहीं देते और कार्यकर्ताओं की नहीं सुनते थे या उनकी मुलाकात मंत्रियों से नहीं हो पाती थी और शायद इसी का खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ा। अब कांग्रेस सरकार उन गलतियों को नहीं दोहराना चाहती। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंत्रियों से स्पष्ट रूप से कहा है कि वे पार्टी के प्रदेश कार्यालय और जिला कार्यालय में समय निर्धारित करें। जहां बैठ कर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ समस्याओं कोक दूर करने का प्रयास करें। कार्यकर्ताओं को महत्व दें और जो भी योजनाएं हैं वे पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को समझाएं, जिससे वे इसका लाभ आमजन को पहुंचा सकें। जाहिर है सरकार अब तमाम प्रकार के छोटे-मोटे गति अवरोधक पार कर चुकी है और अब वह सरकार के कामकाज में गति लाना चाहती है जिससे लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी को इसका लाभ मिले और एक सकारात्मक वातावरण पार्टी के पक्ष में बने। मंत्री भी अपने कामकाज के प्रति उत्साह दिखा रहे हैं और एक तरफ वे जहां मंत्रालय में घंटों बैठकर फाइलों का अध्ययन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर अपने अथाई या सुविधाजनक निवास स्थान पर बैठकर क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और प्रदेशभर से आ रहे नेताओं से मिल रहे हैं। अधिकांश मंत्रियों को जो बंगले आंवटित हुए हैं उन पर रिनोवेशन का काम चल रहा है और १५ जनवरी मकर संक्रांति के बाद शुभ मुहूर्त में गृह प्रवेश की तैयारियां हैं। इसके बाद ऑफिस भी व्यवस्थित रूप से काम करना शुरू करेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री कमलनाथ काम को गति देने में तेजी लाना चाहते हैं। वो सुबह दस बजे मंत्रालय पहुंच जाते हैं और घंटों काम कर रहे हैं जबकि इसके पहले १३ साल मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान की रुचि अधिकांशत प्रदेश ेक दोरों पर हुआ करती थी। कांग्रेस ने जो ‘वक्त है बदलाव का’ नारा दिया था उसका चौतरफा असर दिखाई दे रहा है। अभी बड़े-बड़े आयोजन और बड़े-बड़े विज्ञापन दिखाई नहीं दे रहे हैं। इसके पीछे एक कारण यह भी बताया जा रहा है कि सरकार का खजाना खाली है और वचन पत्र में भारी भरकरम घोषणाएं जिन्हें पूरा करना वह भी समय सीमा में जरूरी है। सरकार की सबसे बड़ी दिक्कत दो-तीन महीने बाद होने वाले लोकसभा चुनाव हैं, जिसके पहले पार्टी ऐसी कोई गलती नहीं करना चाहती, जिसके पहले पार्टी ऐसी कोई गलती नहीं करना चाहती, जिसके कारण उसका आमजन के बीच संदेश बिगड़े। पार्ट कामकाज में रफ्तार चाहती है और सरकार उसी दिशा में अब तेजी से कदम बढ़ाने जा रही है।
०-नया इंडिया के कालम ”राजनैतिक गलियारा” से साभार)
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