क्या अमित शाह को दल्ला मंत्री की जानकारी देंगे राकेश सिंह

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के नये अध्यक्ष बनने के बाद राकेश सिंह अभी भी मुश्किलों में हैं और उनकी इस मुश्किल का हल करने के लिये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को आना पड़ रहा है जिससे वह संगठन में बैठकर उनकी स्थिति को मजबूती प्रदान करें। राज्य के भाजपा के इतिहास में यह शायद पहला अवसर होगा जब किसी भी प्रदेश के भाजपा अध्यक्ष को मजबूती प्रदान करने के लिये राष्ट्रीय अध्यक्ष को भोपाल आकर संगठन में उनकी पैठ और पकड़ बनाने के प्रयास किये जा रहे हों, यह स्थिति भाजपा के संगठन की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान उनकी ‘मैं हूं नÓ की कार्यशैली के चलते बनी जिसके चलते राज्य में संगठन गौण हो गया और संगठन पर सत्ता हावी हो गई राज्य में भाजपा के इन १३ वर्षों के शासनकाल में संगठन नाम की कोई चीज दिखाई नहीं दी। उसके कारण यह बताए जा रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने अपनी मनमर्जी के उन अध्यक्षों को चुना जो उनकी जी हुजूरी करते रहे हों, जिन्होंने नही की उनको पोखरण की तरह परमाणु विस्फोट कर बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस तरह की भाजपा की दुर्गति देख भाजपा के देव दुर्लभ और निष्ठावान कार्यकर्ताओं ने पार्टी से दूरी बना ली और उनका स्थान सत्ता के दलालों ने ले लिया। शायद यही वजह है कि पार्टी के प्रदेश कार्यालय दीनदयाल परिसर में प्रदेश में १४ सालोंं से भाजपा की सत्ता होने के बाद भी खाली दिखाई पड़ता है, जिस कार्यालय में कभी कुशाभाऊ ठाकरे के जमाने से लेकर तत्कालीन प्रभारी संगठन मंत्री नरेन्द्र मोदी तक काफी चहल-पहल रहा करती थी, आज वही दीनदयाल परिसर सूना-सूना नजर आता है तो लगभग यही स्थिति सत्ता की है, सत्ता के अहम सर चढ़कर सत्ताधीशों पर बोल रहा है जिसके चलते शायद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह अहम पाल रखा है कि वह सत्ता और संगठन के सर्वेसर्वा हैं वह जो चाहेंगे वही होगा, चाहे सत्ता में हो या संगठन में शायद यही वजह है कि उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के मनमाफिक प्रदेश में अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने दी, जिसके चलते दलित, आदिवासियों के साथ-साथ ब्राह्मणों की भी उपेक्षा हो रही है। इन वर्गों को मुख्यमंत्री की मर्जी के चलते संगठन में तवज्जो नहीं दी गई, शायद यही वजह है कि संगठन से जुड़े इन वर्गों में असंतोष व्याप्त है। सत्ता के संगठन के हावी होने से राज्य में इस प्रकार की स्थिति बनी कि जहाँ संगठन में सत्ता के दलालों की भरमार हो गई तो वहीं सत्ता में शिवराज मंत्रीमण्डल में भजकलदारम् की बदौलत एक दल्ललानुमा मंत्री ने मंंत्री पद पाने में सफलता हासिल कर ली। भजकलदारम् की बदौलत मंत्री पद पाने वाले इस दल्लानुमा मंत्री को लेकर भाजपा के नेताओं में तरह-तरह की चर्चाओं का दौर जारी है, लेकिन इन सब चर्चाओं पर विराम संगठन के कमजोर होने के चलते इस दल्लानुमा मंत्री का विरोध करने वाले संगठन से जुड़े लोग चुप्पी साधे रहे, लेकिन अब जब पार्टी में नया अध्यक्ष की नियुक्ति हो जाने के बाद नये अध्यक्ष ने जो अपनी राजपूती जात का खुलासा किया उसको लेकर अब सवाल यह उठने लगे हैं कि अब भाजपा में राजपूताना माहौल बनता नजर आएगा और राजपूती आन-बान-शान के अनुरूप वह पार्टी की साख बढ़ाने में हमेशा सक्रिय रहेंगे उनकी इस राजपूती शान को लेकर भाजपा के नेताओं में आस जागी है कि वह चार मई को जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को प्रदेश भाजपा के इतिहास में यह पहला अवसर होगा कि कमजोर पड़ते प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को संगठन की दृष्टि से टेका लगाने के लिये राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को आना पड़ रहा है? इन परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा के देव दुर्लभ और निष्ठावान नेताओं और कार्यकर्ताओं के मन में यह आस जागी है कि जिस प्रदेश के कमजोर अध्यक्ष को संगठन का टेका लगाने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आ रहे हैं क्या प्रदेश भाजपा के नवनियुक्त प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सत्ता और संगठन की उन स्थितियों से अवगत कराने की कोशिश करेंगे जिसके चलते आज भाजपा की प्रदेश में छवि किन कारणों से धूमिल हुई है उन कारणों से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत करायेंगे। क्या राकेश सिंह अमित शाह के समक्ष यह जानकारी देंगे कि जिस चाल, चरित्र और चेहरे के कारण भाजपा का छोटे से लेकर बड़ा कार्यकर्ता गर्व महसूस किया करता था आज शिवराज सिंह की सत्ता के १३ वर्षों के कार्यकाल के दौरान उनके अपने मंत्रीमण्डल में एक दल्लानुमा मेंत्री भी मंत्रीमण्डल की शोभा जबढ़ा रहा है, जिसको लेकर पार्टी में तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं लेकिन पार्टी के अनुशासन में बंधे होने और सत्ता के संगठन पर हावी होने के चलते पार्टी के निष्ठावान और देव दुर्लभ कार्यकर्ता शिवराज मंत्रीमण्डल के इस मंत्री के खिलाल आवासज नहीं उठा पाने की पीढ़ा से जूझ रहे हैं। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि अभी तक तो यह सी चलता रहा क्या आगामी चुनावी समर में उक्त मंत्री को पार्टी द्वारा टिकट देकर चुनाव लड़ाया जाएगा। इस तरह के सवाल भी दीनदयाल परिसर से लेकर चार की दुकानों पर भाजपा के ेनताओं के साथ-साथ आम जनता में भी चर्चा का केन्द्र बना हुआ इस दल्लामुना मंत्री के शिवराज मंत्रीमण्डल में शामिल होने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं लोग चटकारे लेकर करते नजर आ रहे हैं? अब सवाल यह भी उठता है कि मध्यप्रदेश के भाजपा के इतिहास में पहली बार कमजोर प्रदेश के संगठन के नवनियुक्त अध्यक्ष को टेका लगाने के लिये पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को भोपाल आना पड़ रहा है, तो यह सिलसिला कब तक जारी रहेगा।

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