किसानों के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार ने दी भाजपा को क्लीनचिट

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। १५ वर्षों के सत्ता के वनवास से उबरने के दौरान भले ही कांग्रेस के नेताओं ने बयानवीर बनकर तत्कालीन भाजपा सरकार और खासकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान किसानों की समस्याओं को लेकर बहुत राजनीतिक रोटियां सेंकी और पूर्व शिवराज सरकार पर किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज करने के आरोपों की खूब झड़ी लगाई लेकिन जब प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता काबिज हुई तो उन्हीं सब किसानों की समस्याओं को लेकर आरोपों और शिवराज सरकार द्वारा किसानों पर झूठे मुकदमे चलाने जैसे सवाल पर गृह मंत्री बाला बच्चन ने भाजपा सरकार को क्लीनचिट दे डाली, इस क्लीनचिट देने को लेकर उठे सवाल यह बात साफ हो गई कि कांग्रेस केवल किसानों के नाम पर रोटियां सेंक रही थी लेकिन इस तरह की क्लीनचिट देने के बाद अब यह लगने लगा कि कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार १३ वर्षों के पूर्व शिवराज सरकार के कार्यकाल में दर्ज हुए किसानों पर झूठे मामले ही नहीं बल्कि हर मामले को झुठलाने की कोशिश में लगी हुई है तभी तो इससे पूर्व कमलनाथ सरकार ने व्यापमं घोटाले की जांच कराने की घोषणा की थी लेकिन वह जांच कुछ ही दिनों चली और उसके बाद उसे यह कहकर कि विधि विशेषज्ञों से इस संबंध में राय ली जाएगी तब व्यापमं मामले की जांच कराई जाएगी? सवाल यह भी उठता है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ बार-बार पूर्व शिवराज सरकार में हुए घोटालों की जांच कराने की घोषणा कर रहे हैं, किसानों और व्यापमं के मामले में सरकार द्वारा दी गई क्लीनचिट से यह संकेत मिलते हैं कि अपने वचन पत्र में जनता से किये पूर्व शिवराज सरकार के घोटालों की जांच क्या वचन पत्र के अनुसार हो सकेगी या फिर किसानों पर झूठे मुकदमे चलाने जैसे मामलों में कमलनाथ सरकार के गृह मंत्री द्वारा दी गई क्लीनचिट देने जैसा सिलसिला जारी रहेगा। मध्यप्रदेश विधानसभा के झूठ का एकबार फिर पर्दाफाश हो गया। वजह रही साल २०१७ में जिस किसान आंदोलन के बाद से ही तत्कालीन शिवराज सरकार को किसानों पर झूठे मुकदमे दर्ज करने का आरोप लगा कर कांग्रेस ने खूब कोसा, उस कार्यवाही को अब सत्ता मिलने के बाद कमलनाथ सरकार सही बता रही है। कमलनाथ सरकार के गृहमंत्री बाला बच्चन ने कांग्रेस के ही विधायक हरदीप सिंह डंग के एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि किसानों पर विधि सम्मत प्रक्रिया अनुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए। कांग्रेस के विधायक हरदीप सिंह डंग ने गृहमंत्री बाला बच्चन से सवाल पूछा था कि मई और जून २०१७ में कितने किसानों के खिलाफ राजनीतिक द्वेषतापूर्ण मामले दर्ज किए गए हैं और राज्य सरकार ने उन पर क्या कार्यवाही की है? इस सवाल का गृह मंत्री बाला बच्चन ने लिखित जवाब दिया है कि विधि सम्मत प्रक्रिया के तहत उस समय किसानों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए हैं। गृहमंत्री बाला बच्चन ने जब शिवराज सरकार में किसानों के खिलाफ हुई पुलिस की कार्यवाही को विधि सम्मत बताते हुए तत्कालीन भाजपा सरकार को क्लीनचिट दे दी तो इस पर सवा लठना लाजिमी है। अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या कांग्रेस ने किसानों केक नाम पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए झूठ बोला क्योंकि तब किसानों पर की गई कार्यवाही को झूठा बताते हुए कांग्रेस ने भाजपा पर किसान विरोधी होने का आरोप लगाया था और विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे को खूब भुनाया भी था। विधानसभा में पूछे सवाल पर गृहमंत्री बाला बच्चन ने विधायक हरदीप सिंह डंग को बताया है कि किसानों पर दर्ज प्रकरणों की वापसी के लिए दिशा निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं। बता दें कि पहले फरवरी २०१९ में विधायक हर्ष गहलोत द्वारा विधानसभा में पूछे गए लिखित सवाल का जवाब देते हुए गृहमंत्री ने बताया था कि जून २०१७ को महू-नीमच हाइवे पर की गई पुलिस फायरिंग स्टेंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर के तहत आत्मरक्षा के लिए की गई थी। भाजपा ने इसे मंदसौर मामले पर कांग्रेस का यू-टर्न बताया था और उस वक्त विवाद इसलिए भी ज्यादा बढ़ गया था क्योंकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने इस मामले में खुद की सरकार के गृहमंत्री को कटघरे में खड़ा कर दिया था। तत्कालीन शिवराज सरकार में पुलिस कार्यवाही को विधि सम्मत बताने के बाद भाजपा ने कांग्रेस पर जमकर हल्ला बोला है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि किसान आंदोलन को लेकर कांग्रेस ने झूठ भ्रम का वातावरण बनाने का प्रयास किया था और यह प्रचारित किया कि भाजपा की सरकार ने दमनपूर्वक कार्यवाही की, लेकिन कांग्रेस द्वारा फैलाए गए झूठ की कलई आज उनके ही विधायक द्वारा विधानसभा में लगाए गए प्रश्न में खुल गई। कांग्रेस झूठ की राजनीति करती है यह फिर से जगजाहिर हो गया है। गोपाल भार्गव ने कहा कि कांग्रेस एक झूठ को दस बार बोलकर सच साबित करने की कोशिश करती है, लेकिन जनता कांग्रेस के झूठ में नहीं आने वाली। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के जिम्मेदार नेताओं को यह बताना चाहिए कि चुनाव के समय जो पहले कही गई थी वह झूठ था या आज विधानसभा में किसान आंदोलन को लेकर जो बात कही गई है वह झूठ है? किसानों को लेकर झूठ की राजनीति करने वाली कांग्रेस एक बार फिर बेनकाब हो गई है।

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