कांग्रेस : निजी दुकान बने पार्टी

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०-डॉ. वेदप्रताप वैदिक
कांग्रेस के अध्यक्ष पद से राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कई अन्य युवा नेताओं के इस्तीफों की झड़ी लग गई है। लेकिन कांग्रेस के खुर्राट बुजुर्ग नेताओं में से किसी ने भी इस्तीफा नहीं दिया है, क्योंकि चुनाव-प्रचार के दौरान उनका कोई महत्व ही नहीं था। कांग्रेस का मतलब सिर्फ राहुल गांधी था जैसे भाजपा का मतलब था, सिर्फ नरेन्द्र मोदी, २०१९ का चुनाव वास्तव में न तो किसी विचारधारा पर लड़ा गया ओर न ही किसी नारे पर। यह चुनाव तो अमेकिरी चुनाव की तरह अध्याक्षत्मक चुनाव था। भाजपा फिर भी भाई-भाई पार्टी थी। अमित शाह और नरेन्द्र भाई! लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस तो मां-बेटा पार्टी भी नहीं रही। सिर्फ बेटा पार्टी बनकर रह गई। बेटो ने यों तो कोई कसर नहीं छोड़ी। बड़ी मेहनत की। बहुत घूमा। बहुत बोला। नहीं बेलाने लायक भी बोला। अपनी पप्पुपने की छवि को भी सुधारा लेकिन चुनाव-परिणाम ने दिल तोड़ दिया। अब इस्तीफा दे दिया। तभी कांग्रेस पार्टी के होश गुम हैं। अभी तक वह नया अध्यक्ष नहीं ढूंढ पाई। कोई भी इस प्रायवेट लिमिटेड कंपनी का अध्यक्ष बनकर करेगा क्या? उसे मां-बेटे का रबर का ठप्पा ही बनना पड़ेगा। क्या अध्यक्ष का चुनाव कांग्रेस के लाखों कार्यकर्ता मिलकर करेंगे? क्या ्रपदेशों की कार्यकारिणी समितियां करेंगी? क्या केंद्रीय कार्यसमिति में चुनाव के द्वारा अध्यक्ष बनाया जाएगा? सबसे पहले कांग्रेस का प्रयावेट लिमिटेड कंपनी से बदलकर एक राजनीतिक पार्टी का रूप दिया जाना चाहिए। कांग्रेस के कफैलाए हुए जहर को भाजपा ने भी निगल लिया है। उसका स्वरूप भी प्रायवेट लिमिटेड कंपनी की तरह होता चला जा रहा है। हमारी प्रांतीय पार्टियां तो पहले से ही प्रायवेट कंपनी ही नहीं, निजी दुकानों भी बनी हुई हैं। हमारी सभी पार्टियां नोट और वोट के झांड कूटने में लगी हुई है। सबने अपना-अपना जातीय और सांप्रदायिक जनाधार बना रखा है। कांग्रेस के लिए यह अमूल्य अवसर है कि वह इस समय देश का लोकतंत्र के मार्ग पर चला दे। अभी चाहे हारी हुई उदास और छोटी पार्टी ही है, लेकिन वह अपने अध्यक्ष का चुनाव लाखों सदस्यों के वोट से करे तो वह अध्यक्ष इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को सचमुच राजनीतिक पार्टी में बदल सकती है। यह प्रचंड जन-आंदोलन छेड़ सकती है। सरकार को यह सही रास्ते पर चलने के लिए मजबूर कर सकती है। आज देश के हर जिले, हर शहर और हर गांव में कांग्रेस का कोई न कोई नामलेवा मौजूद है। उसके पास कई अनुभवी नेता भी हैं। यदि कांग्रेस में अब भी बुनियादी सुधार नहीं हुआ तो यह भी ब्रिटेन की हीरो और व्हिग पार्टी की तरह इतिहास का विषय बन जाएगी। भारत के लोकतंत्र का यह दुभागर््य होगा।
०-नया इंडिया से साभार)
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