कांग्रेस का टिकट पाना यानी आधी लड़ाई जीतना

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०- अरुण पटेल
प्रदेश में सुंदरलाल पटवा के नेतृत्व में बनी पहली भाजपा सरकार में कैलाश जोशी उद्योग मंत्री थे। पुरानी विधानसभा का वह कक्ष जहां विधायकों व पत्रकारों को सामूहिक भोज दिया जाता था वह कुछ छोटा था। सत्र के दौरान भोज का आयोजन था लेकिन भोजन लेने वालों की संख्या काफी अधिक थी। कैलाश जोशी ने प्लेट में भोजन ले लिया लेकिन इस बीच किसी दूसरे की प्लेट की दाल उनके कुर्ते में लग गयी, बाद में जोशी सोफे पर जाकर बैठ गए। इस बीच इंदौर के कांग्रेस विधायक ललित जैन वहां आये और जोशीजी से पूछा क्या आइसक्रीम लेंगे। जोशीजी के हावभाव से ऐसा लगा कि इस भीड़ में आइसक्रीम लेने वे नहीं जाना चाहते। ललित जैन फौरन बोले कि आप बैठिए मैं लेकर आता हूं। कुछ ही मिनिटों में ललित जैन आइसक्रीम लेकर आये और जोशी को थमा दी। जोशीजी ने सहज स्वाभाविक ढंग से सवाल पूछा कि इतनी भीडभाड़ में आप इतनी जल्दी आइसक्रीम कैसे ले आये। ललित जैन का उत्तर भी कुछ वैसा ही था और वे बोले कि जोशीजी जब हमने कांग्रेस की टिकिट पा ली जिसमें इतनी ज्यादा मारामारी होती है तो आइसक्रीम लाना कौन सी बड़ी बात थी। ललित जैन यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने कांग्रेस की टिकट पाने का किस्सा सुनाया। उनका कहना था कि कांग्रेस में टिकट पाना यानी चुनाव की आधी लड़ाई जीत लेना होता है और उसके बाद प्रचार का एक चौथाई समय उन लोगों को मनाने में चला जाता है जो या तो टिकट से वंचित हो गये या रुठ कर घरों में बैठ गये, बाकी बचे हुए समय में मतदाताओं को साधते हैं। यानी कांग्रेस विधायक बनना काफी धैर्य और साहस का काम है। यदि टिकट मिल गयी तो उसके आगे का रास्ता अपने आप आसान हो जाता है। यह बात भले ही उन्होंने कांग्रेस की लहर के दिनों के लिए कही हो लेकिन ललित जैन 1990 का विधानसभा चुनाव भी जीते जबकि उस समय के चुनाव में कांग्रेस के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं थीं। कांग्रेस में टिकट पाना इतना पेचीदा है कि कई बार जिसकी टिकट पक्की समझी जाती है उसकी कट जाती है और ऐसे लोगों को टिकट मिल जाती है जिसका अनुमान भी नहीं होता। 1980 के विधानसभा चुनाव के लिए टिकट बंटते समय तत्कालीन कांग्रेस महासचिव अजीज कुरेशी प्रदेश चुनाव समिति के सचिव होने के नाते 320 टिकटें तय करते समय नामों की काट-छांट कर रहे थे। उनके निवास पर ही कांग्रेस के पैनल तैयार हो रहे थे। अधिकांश एक्सरसाईज उन्होंने ही की और जब कांग्रेस की सूची सामने आई तो उसमें अजीज भाई का नाम ही नदारद था। सबको टिकट बांटते-बांटते वे स्वयं टिकट से वंचित रह गये। वर्तमान में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पैराशूट से उतरने वालों और सर्वे में नाम न आने वालों को टिकट नहीं देने की सार्वजनिक मंच से घोषणा कर चुके हैं। अब देखने की बात यह होगी कि उनकी घोषणा पर अमल होता है या फिर कांग्रेस की परम्परा के अनुसार जमीन से कटे नेताओं से जुड़े कुछ चौंकाने वाले नाम भी सूची में जुड़ते हैं।
०- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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