कहीं अपने पिताश्री की तरह साजिश का शिकार तो नहीं हो रहे सिंधिया

0
403

०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। कांग्रेस की आपसी गुटबाजी के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिताश्री कैलाशवासी माधवराव सिंधिया को न तो राष्ट्रीय और न ही प्रादेशिक स्तर के नेताओं ने प्रदेश का मुख्यमंत्री उन्हें बनने दिया लगता है ठीक इसी तरह की साजिश उनके पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ इन दिनों कांग्रेसी रचने में लगे हुए हैं, तभी तो उनकी अपने पिताश्री की तरह उन्हें न तो मुख्यमंत्री बनने दिया और बात जब प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभालने की आई तो उन्हें उससे भी वंचित करने के लिये पता नहीं जिन राहुल गांधी की कैबिनेट में ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम आता है उन्होंने व उनकी माताजी सोनिया गाधी जी ने उन्हें महाराष्ट्र का चुनाव प्रभारी बनाकर उन्हें प्रदेश की राजनीति से दूर कर अब उनकी लगता है मध्यप्रदेश में राजनीति दखलंदाजी खत्म करने की तैयारी की जा रही है इस तैयारी के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया… सिर्फ मध्यप्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्र की राजनीति रूप से किसी भी स्तर पर अनदेखा किया जा सकता। जो सत्ता का वनवास काट रही कांग्रेस के लिए उसकी वापसी की सबसे बड़ी उम्मीद थे, तो वहीं कांग्रेस कि सत्तारूढ़ होने के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वह कहीं भी कमलनाथ से १९ साबित नहीं हुए, हालांकि कांग्रेस आलाकमान की मंशा और प्रदेश इकाई के असहयोग ने उन्हें पीछे जरूर धकेल दिया। उसके बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक सिंधिया का नाम चर्चाओं में बना ही रहा, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद तेजी से बदलते घटनाक्रम ने राजनीति के इस सितारे को अचानक ही उस स्थिति में पहुंचा दिया, जहां इसके चारों तरफ एक तरह के अंधेरे को हर कोई महसूस कर सकता है, साथ ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह राजनीति के पटल पर सिमटती जा रही है सिंधिया की भूमिका और उनके नाम की चमक। वर्तमान समय में राजनीति की गति भी अपने चरम पर है, एक पल के लिए पीछे रहने वाले के लिए शायद कोई इंतजार नहीं करता, सिंधिया राजघराने के वंशज ज्योतिरादित्य सिंधिया को इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण माना जा सकता है। जहां कल तक उनके पीछे बागी होने वाले चेहरे भी आज उनके नाम का जिक्र करने से दूर भाग रहे हैं। जी हां, ज्यादा दिन पुरानी बात नहीं है, जब सिंधिया को मध्यप्रदेश कांग्रेस का मुखिया बनाने के लिए उनके समर्थक लगभग आधा दर्जन मंत्रियों ने भोपाल से दिल्ली तक आसपास सिर पर उठा लिया था। दिन बंद कमरों में बैठकें करके मुख्यमंत्री कमलनाथ पर दबाव बनाया जाता था, लेकिन कुछ दिनों में ही हालात यूँ हो गए हैं कि मौजूदा समय में जब मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष के लिए अटकलों और मंथनों का दौर जारी है, ऐसे में सिंधिया के समर्थक मंत्री अपने नेता का नाम आगे बढ़ाना तो दूर बल्कि उनका जिक्र तक नहीं कर रहे। अब उन मंत्रियों का अपने नेता में विश्वास नहीं रहा, या तो उनकी क्षमताओं पर संदेह करने लगे हैं, यह तो वही जानें। यहां जब सिंधिया ओर उनकी राजनीतिक भूमिका पर चर्चा हो रही है, तो इस विषय पर भी गौर करना जयरी है कि फिलहाल कांग्रेस में किस तरह उनका सम्मान बरकरार रखा जा सकता है। बात अगर मध्यप्रदेश की करें, तो इस बात की संभावना काफी कम ही है, कमलनाथ सिंधिया के लिए कोई खाली जगह छोड़ें, क्योंकि पिछले कुछ समय में बने राजनीतिक हालात ने नाथ और सिंधिया को न चाहते हुए परस्पर एक दूसरे का विरोधी बना दिया था, और सुविधाजनक क्षेत्र में रहने की आदी कमलनाथ-सिंधिया को प्रदेश की राजनीति में प्रवेश देकर कोई चुनौती मोल लेना नहीं चाहेंगे। बात अगर राष्ट्र की राजनीति की करें, तो यहां पर राहुल के बाद अध्यक्ष पद को लेकर सिंधिया का नाम एक दो बार चचा्र्रओं में तो उछला था, लेकिन इसकी संभावना शुरुआत से ही नगण्य मानी जा रही थी, अब सोनिया गांधी के अंतरिम अध्यक्ष बनने के बाद फिलहाल संबंधित उम्मीद भी बेमानी है। लेकिन इस बीच उन्हें जो जिम्मेदारियां मिल रही हैं, वह अपेन आपमें कम चुनौतीपूर्ण नहीं है। लोकसभा चुनाव में सिंधिया को प्रियंका वाड्रा गांधी के साथ पूर्वी उत्तरप्रदेश की जिम्मेदारी मिली, उत्तरप्रदेश को जीतना कांग्रेस के लिए किसी भी स्थिति में आसान नहीं था, और ऐसा ही हुआ भी और सिंध्ािया उधर तो असफल हुए ही साथ ही अपनी पांरपरिक गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट भी गंवा बैठे। अब एक बार फिर उनके सिर पर महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी के तौर पर कांटो भरा ताज रखा गया है, इस समय महाराष्ट्र की स्थिति भी कांग्रेस के प्रतिकूल है, और वहां पहुंचकर सिंधिया शायद ही कांग्रेस के लिए कुछ खास कर सकें। महाराष्ट्र में सिंधिया का कुछ असर दिखा या दिखे, लेकिन इस जिम्मेदारी ने मध्यप्रदेश में कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष की अटकलों से जरूर सिंधिया का नाम बाहर कर दिया है और बहुत संभव है, कि आने वाले दिनों में सिंधिया मध्यप्रदेश कांग्रेस के बेनर पोस्टरों से भी सिमट जाएं। सिंधिया महासचिव ही रहेंगे? पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के महासचिव ही रहेंगे और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी के बाद तीसरे युवा नेता होंगे जो देश भर में कहीं भी काम करेंगे, लेकिन किसी प्रमुख पद पर विराजमान नजर नहीं आएंगे। सोनिया गांधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए बनाई गई कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष बना दिया है। बता दें कि सिंधिया राजवंश का मूल महाराष्ट्र ही है। माना जा रहा है कि कांग्रेस अब ज्योतिरादित्य सिंधिया मराठी नेता के रूप में प्रतिबंधित करना चाहती है। ज्योतिरादित्य सिंधिया का वंश महाराष्ट्र से ही आता है। अत: मराठी मानुष की राजनीति में वोव फिट बैठते हैं। अब देखना यह है कि महाराष्ट्र के मराठी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया में किसकी छवि देखते हैं माहादजी शिंदे या जयाजीराव सिंधिया यह तो विधानसभा चुनाव के पश्चात ही पता चल सकेगा।

००००००००००००

LEAVE A REPLY