कर्नाटक के बाद मध्यप्रदेश, राजस्थान की बारी ?

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भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। कर्नाटक में भाजपा की सरकार बनना महज वक्त की बात है। यहां ऑपरेशन कमल की कामयाबी के साथ अंजाम दिया जा चुका है। कांग्रेस और जेडीएस के नेता पिछले एक हफ्ते से जो कुछ भी कर रहे हैंवह दीये के बुझने से पहले की फडफ़ड़ाहट है। अब तक कांग्रेस और जेडीएस के १६ विधायक इस्तीफा दे चुके हैं और निर्दलीय व अन्य बसपा विधायक खुशी खुशी अपना समर्थन देने भाजपा के खेमे में चले गए हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन की संख्या घट कर एक सौ रह गई है। भाजपा की सरकार बनने के बाद ऑपरेशन कमल और जोर शोर से चलेगा। तब यह संख्या और कम होगी। सो, अब सवाल है कि कर्नाटक के बाद किसकी बारी है? मध्यप्रदेश की? मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार ने अपना बजट पेश किया है और किसानों को केन्द्र में रखकर ढेर सारी घोषणाएं की हैँ। इस पर बजट का अमल का मौका सरकार को शायद ही मिल पाएगा। भाजपा के जानकार सूत्रों का कहना है कि वहां कांग्रेस की सरकार गिराने की पूरी तैयारी हो गई है। भाजपा ने ऐसे घेराबंदी की है कि कमलनाथ की अपनी सरकार मजबूत करने का मौका नहीं मिल रहा है। वे खुद चुनाव लडऩे के लिए भी किसी भाजपा विधायक से इस्तीफा नहीं करा पाए। कर्नाटक के मुकाबले मध्यप्रदेश में कम इस्तीफे कराने होंगे। वहां कांग्रेस और भाजपा के बीच सिर्फ पांच सीटों का फर्क है। सो, भाजपा की योजना के मुताबिक कांग्रेस के पांच विधायक इस्तीफा दे दें और सरकार को समर्थन दे रहे सपा, बसपा व निर्दलीय विधायक भाजपा के साथ आ जाएं तो भाजपा की सरकार बन जाएगी। पहले ऐसा लग रहा था कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहेगी पर अब लग रहा है कि जैसे कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा की कमान में ऑपरेशन कमल चला है वैसे ही मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की कमान में ऑपरेशन कमल चलेगा। मध्यप्रदेश के बाद राजस्थान की बारी आएगी। वहां भाजपा को ज्यादा मेहनत करनी होगी। इसलिए उसे सबसे आखिर में रखा गया है। ध्यान रहे राजस्थान में कांग्रेस के अंदर घमासान चल रहा है। भाजपा इसका फायदा उठाएगी। कांग्रेस से संबद्ध निर्दलीय विधायकों पर उसकी नजर है। उकसे बाद कांग्रेस के कुछ विधायकों का इस्तीफा कराया जा सकता है। हालांकि यहां भाजपा की सरकार बनाने में थोड़ी मुश्किल आएगी क्योंकि भाजपा के विधायकों की संख्या और बहुमत के आंकड़े में २७ का फर्क है। इसलिए संभव है कि अपनी सरकार बनाने की बजाय कांग्रेस के अंदरूनी झगड़े का फायदा उठा कर सरकार गिरा दी जाए और मध्यावधि चुनाव कराया जाए। तभी भाजपा के जानकार नेता दावे के साथ कह रहे हैं कि राज्य की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगी।
०-नया इंडिया के कालम ”राजरंग” से साभार)
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