कईयों की कमाई का साधन है न्यू मार्केट के अवैध हाँकर्स

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। भाजपा की सरकार के सत्ता से बेदखल हो जाने के कुछ ही माह बाद राजधानी की मुख्य बाजार न्यू मार्केट के व्यापारियों द्वारा अवैध हाँकर्स के मुद्दे को लेकर स्थानीय विधायक एवं मुख्यमंत्री कमलनाथ मंत्रिमंडल के सदस्य पी सी शर्मा के संरक्षण में हाँकर्स क अतिक्रमण बढ़ रहा है इस प्रकार का आरोप लगाते हुए यह चेतावनी भी दी कि यदि इस पर रोक नहीं लगी तो व्यापारी 26 मार्च से अनिश्चित कालीन बंद कर देगें। वैसे शहर के बाजारों में इस तरह से अवैध हाँकर्स के द्वारा अतिक्रमण करने का मामला कोई न्यू मार्केट के व्यापारियों के लिए नया मुद्दा नहीं है। बल्कि राजधानी के हर बाजार की है। क्योंकि यह सब राजनेताओं और नगर निगम के अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के साथ – साथ अनेकों की कमाई का जरिया भी है। भाजपा की शिवराज सिंह चौहान की सरकार में तो इस तरह के अतिक्रमण के मुद्दे को लेकर अनेकों बार भाजपा के नेताओं जिनमें भाजपा के ही विधायक सुरेन्द्रनाथ सिंह और नगर निगम के अतिक्रमण दस्ता सहित पुलिस से अनेकों बार पंगा हुआ है। वैसे राजधानी के न्यू मार्केट सहित मुख्य बाजारों में अतिक्रमण करवाने में नगर निगम भी कम दोषी नहीं है। क्योंकि इस तरह के गोरखधंधे से पार्षद से लेकर महापौर और राजनेताओं की कमाई का जरिया भी होता है? आज भले ही न्यू मार्केट के कारोबारी अवैध हाँकर्स का विरोध कर रहे हैं। मगर हकीकत यह भी है कि इन कारोबारी भी अतिक्रमण करवाने में राजनेताओं की तरह कम दोषी नहीं हैं? यह भी अपनी – अपनी दुकानों के सामने पैसे लेकर अवैध हाँकर्स को बैठाते हैं। इसका फायदा उठाकर जब नगर निगम के महापौर के पद पर आलोक शर्मा के बैठे ही नगर निगम के बार्ड प्रभारी ने न्यू मार्केट के व्यापारियों से दस हजार रुपए की बसूली भी कर महापौर की उक्त बसूली में कुछ राशि भेंट की थी? जब महापौर को इस बात की जानकारी हुई कि बसूली गई राशि में से कुछ हिस्सा अधिकारी ने अपने पास रख ली। तब महापौर मामले ध्यान हटाने के लिए उक्त प्रभारी के खिलाफ कार्यवाही तो कि लेकिन बाद उसे अच्छे मलाईदार शाखा में पदस्थ कर दिया था। तब से अतिक्रमण के नाम पर प्रतिमाह एक निश्चित राशि पंहुचने की चर्चाएं चटखारे लेकर लोग करते नजर आ रहे हैं। बात यदि भाजपा के पूर्व विधायक सुरेन्द्रनाथ सिंह की करें तो उनका दरबार भी न्यू मार्केट में लगता है। इसी दरबार में हाजिरी लगाकर अनेकों ने इस गोरखधंधे को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है। वैसे बर्षो से भोपाल नगर निगम पर भाजपा का कब्जा है। इस दौरान भाजपा के कितने नेताओं ने कहा अपने लोगों को अतिक्रमण करवाया होगा यह जांच का बिषय है। तो नगर निगम के अधिकारियों के भी कुछ हाँकर्स न हो यह हो नहीं सकता उन्होंने भी बहती गंगा में डुबकी लगाई होगी? भाजपा शासनकाल में सत्ता का लाभ उठाते हुए नगर निगम के एम आई सी के राजस्व प्रभारी शंकर मकोरिया ने हाँकर्स कार्नरों के नाम पर जमकर खेल खेला यह भी जांच का बिषय है। अब जब सत्ता परिवर्तन के साथ ही कांग्रेस के नेताओं पर उनके समर्थकों का दबाव बढना प्रारंभ हुआ तो उन्होंने भी अपनों को रोजगार देने की पहल शुरु करदी। जिसका विरोध होने लगा। कांग्रेसी नेताओं की इस पहल के पीछे भाजपा की एक सोची समझी रणनीति है? इस रणनीति का संकेत मुख्यमंत्री कमलनाथ के द्वारा मीडिया के साथ होली मिलन कार्यक्रम में भोपाल से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के लोकसभा चुनाव उतरने की घोषणा के बाद जो निजी टी वी चैनल पर चली बहस के दौरान भाजपा के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल की यह कहना कि कांग्रेस के द्वारा दिग्विजय सिंह को भोपाल के लोकसभा चुनाव में उतारकर हमारी पार्टी भाजपा को प्रदेश की 29 लोकसभा चुनाव के लिए अहंम मुद्दा दे दिया है? यह लोकसभा चुनाव दिग्विजय सिंह के मुद्दे पर लडा जाएगा? भाजपा के इस तरह के बयान के तुरंत एट दिन बाद न्यू मार्केट के व्यापारियों द्वारा राज्य के कांग्रेसी शासन के मंत्री पी सी शर्मा अवैध हाँकर्स को संरक्षण देने के आरोप लगाकर विवाद खडा करने को लेकर तरह – तरह की चर्चाओं का दौर जारी है? लोग इस विवाद को दूरगामी परिणाम के तौर पर देख रहे हैं? तो वहीं लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि अवैध हाँकर्स का मामला तो एक बहाना है असली निशाना तो कहीं ओर है? जिसका संकेत भाजपा के प्रवक्ता अपनी पार्टी की प्रदेश की ओर से आगामी लोकसभा चुनाव भोपाल से कांग्रेस द्वारा दिग्विजय सिंह की उम्मीदवारी के साथ भाजपा ने 29 लोकसभा के चुनाव लडऩे के लिए नीति में बदलाव कर बनाई? प्रदेश भाजपा के नेताओं की तरह पार्टी के हर नेता की प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दोवरा काबिज करने के लिए कई महीनों पूर्व से बना रखी है। दिग्विजय के बहाने अपनी इस रणनीति को मध्यप्रदेश में अपनाने का अवसर कांग्रेस ने भाजपा को दे दिया है? न्यू मार्केट का कथित विवाद इसका एक बहाना मात्र है?

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