एंटी इनकंबेसी से डरी भाजपा कई मंत्रियों और विधायकों के टिकट काट सकती है

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में उनकी भलमनसाहत और सहजता का लाभ उठाते हुए भाजपा के मंत्रियों, अधिकारियों और सत्ता के दलालों व ठेकेदारों का जो रैकेट इस प्रदेश में सक्रिय हुआ जिस रैकेट की मिलीभगत से शिवराज सरकार के कार्यकाल में हर जनहितैषी योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राही और किसानों, बेरोजगारों, मजदूरों दलितों और आदिवासी वर्ग से जुड़े लोगों को नहीं बल्कि इस रैकेट के द्वारा हर योजना को फर्जी आंकड़ों के जरिये रंगोली सजाकर मुख्यमंत्री को गुमराह कर अपनी तिजोरी भरने का जो काम शिवराज शासनकाल में खूब फला-फूला यही वजह है कि आज भाजपा का हर जनप्रतिधि शिवराज सरकार के कार्यकाल के आने के पूर्व जनकी हैसियत शिवराज सरकार के आने के पूर्व टूटी साइकिल तक खरीदने तक की नहीं थी आज वह आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं। तो वहीं राज्य के सहकारिता जैसे विभाग में ठेठ आदिवासी जिले झाबुआ में कार्यरत आदिवासी जिले में पजेरो गाड़ी में फर्राटे लेते नजर आ रहे हैं यह है शिवराज सरकार के कार्याकल के दौरान चले विकास का सही नमूना जिसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विकास का ढिंढोरा पीटते नजर आ रहे थे उनके इस कथित विकास को पलीता लगाने का काम भाजपा के जनप्रतिनिधियों और उनके चंद चहेते अधिकारियों ने जमकर किया। यही वजह है कि वर्षों से सत्ता से वंचित विभिन्न गुटों में बंटी कांग्रेस जब एक मंच पर आने का दिखावा करती नजर आ रही है तो ऐसी स्थिति में अब भाजपा को चौथी बार सत्त्ता हासिल करने के लिये राह आसान दिखाई नहीं दे रही है और कभी एंटी इनकमबेंसी के नाम पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भाजपा के ही अपने नेता बदनाम करने में लगे हुए हैं और यह कहते नजर आ रहे हैं कि शिवराज सरकार की कार्यशैली के कारण प्रदेश में एंब्ी इनकमबेंसी का माहौल बन रहा है यह सब खेल भाजपा के वह नेता कहते नजर आ रहे हैं जिनकी हैसियत सौ लोगों की भीड़ जुटाने की नहीं और वह अपनी राजनीति चमकाकर स्कूली बच्चों को संबोधित करने में अपनी लोकप्रियता का दावा करते नजर आ रहे हैं लेकिन धरातल पर उनकी पकड़ नाम मात्र की भी नहीं है हाँ यह जरूर है कि वह अपने हवा हवाई बयानों के जरिये हमेशा समाचार की सुर्खियों में बने रहने में सफलता अर्जित करते रहते हैं, ऐसे नेताओं की बदौलत आज मुख्यमंत्री शिवराज चौहान की मेहनत और लगातार की जा रही घोषणाओं के बाद भी प्रदेश में भाजपा की स्थिति में ज्यादा सुधार नहीं हो रहा है। कांग्रेस ने अभी तक आक्रामक चुनाव प्रचार की शुरुआत नहीं की है और न उसके नेता अभी तक सड़क पर उतरे हैं। इसके बावजूद एंटी इनकमबेंसी इतनी अधिक है कि भाजपा और मुख्यमंत्री की चिंता लगातार बढ़ रही है। यह हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि खुद भाजपा द्वारा हाल ही में कराए गए सर्वे में यह बात सामने आई हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर बहुत अधिक असंतोष है। इसे दूर करने के लिए भाजपा हाईकमान को बिना किसी भेदभाव के करीब ४० फीसदी वर्तमान विधायकों के टिकट सख्ती से काटने होंगे। इंटरनल सर्वे में यह बात सामने आई है कि प्रदेश के दर्जन भर मंत्रियों की स्थिति उनके निर्वाचन क्षेत्रों में अच्छी नहीं है। सर्वे में कहा गया है कि यदि इन मंत्रियों को दोबारा टिकट दिया जाता है, तो सीट हारने की पूरी-पूरी संभावना है। जानकारी के अनुसार भाजपा द्वाराज ून माह में कराए गए सर्वे में यह साफ हो गया है कि पार्टी कोक दर्जन भर मंत्रियों के अलावा चालीस फीसदी विधायकों के टिकट काटने पड़ेंगे, तभी पार्टी की जीत की संभावना बन सकती है। यदि वर्तमान विधायकों को टिकट दिया जाता है, तो भाजपा की राह बहुत मुश्किल है। इन मंत्रियों की हालत पतली – जिन मंत्रियों की क्षेत्र में स्थिति खराब है, उनमें पीएर्च मंत्री सुश्री कुसुम मेहदेले, वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार, नगरीय विकास मंत्री श्रीमती माया सिंह, खाद्य व नागरिक आपूर्ति मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे, उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री ललिता यादव, पर्यटन राज्यमंत्री सुरेन्द्र पटवा, राज्यमंत्री हर्ष सिंह, कृषि मंत्री बालकृष्ण पाटीदार, आदिम जाति कल्याण राज्यमंत्री लाल सिंह आर्य, किसान व कृषि विकास मंत्री गौरीशंकर बिसेन, चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री शरद जैन, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण राज्यमंत्री सूर्यप्रकाश मीणा व वित्त मंत्री जयंत मलैया सहित कांग्रेस से भाजपा में आए खनिज कारोबारी संजय पाठक की भी स्थिति अपने क्षेत्रों में डंवाडोल नजर आ रही है।

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