इन तीनों को अब दिल्ली लाइए

0
121

०-डॉ. वेदप्रताप वैदिक
मैं पहले ही लिख चुका हूं कि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के भाजपा मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने राज्य में काफी अच्छे काम किए थे लेकिन उनकी हार का बड़ा कारण नोटबंदी, जीएसटी, अनुसूचित संशोधन कानून, सर्जिकल स्ट्राइक, सीबीआई और राफेल सौदे आदि की बलनामियां रही है। सच्चाई तो यह है कि उन्हेें उम्मीद से ज्यादा वोट मलते हैं।यह भी ठीक है कि इन हिंदी-प्रदेशों के लोग भाजपा में नए चेहरे चाहते हैं तो क्या यह उचित समय नहीं है, जबकि तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों – शिवराज सिंह चौहान, वसुंधरा राजे और रनमन सिंह को केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में शामिल किया जाए? ये तीनों जितने अनुभवी नेता हैं और उन्हें आम आदमियों की आकांक्षाओं की जितनी पकड़ है, उतनी मोदी-मंत्रिमण्डल के एक-दो मंत्रियों को भी नहीं है। ये तीनों मिलकर केंद्रीय मंत्रिमण्डल को काफी वजनदार और विश्वसनीय बना देंगे। इन तीनों राज्यों में हुए चुनाव के पहले ही मुझे लग गया था कि इन राज्यों में भाजपा का जीतना बहुत मुश्किल है। उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के कुछ नेताओं से हुई मेरी बातचीत में मैंने साफ-साफ कहा था कि ये तीनों मुख्यमंत्री हारे या जीतें, यह जरूरी है कि इन्हें केन्द्र में लाया जाए और इनके अनुभव का फायदा देश को मिले। यह ठीक है कि मोदी के मंत्रिमण्डल में राजनाथ, गडकरी, सुषमा स्वराज और पीयूष गोयल जैसे योग्य लोग हैं लेकिन ये तीनों नेता भी शामिल हो जाएं तो प्रधानमंत्री को भी उचित सलाह मिल सकती है। अभी तो भाजपा का ‘मार्गदर्शक मंडल’ मार्ग देखते रहने वाला मंडल बन चुका है और मंत्रिमंडल भी ”मातहंतों का मौन समूह” बन गया है। यदि यह स्थिति अगले छह माह तक बनी रही तो भाजपा की सीटें २०१४ के मुकाबले २०१९ में आधी भी नहीं रह पाएंगी। मैं चाहता हूं कि भाजपा यदि विपक्ष में चली जाए तो भी वह सबल विपक्ष की तरह काम करे और यह भी संभव है कि मंत्रिमण्डल का विस्तार हो जाए तो भाजपा शायद इस लायक हो जाए कि वह जैसे-तैसे अपनी सरकार बना ले। इन तीनों पूर्व मुख्यमंत्रियों के शामिल होने से मोदी सरकार की छवि में विनम्रता, उदारता और शिष्टता की भी अीिावृद्धि होगी। भाजपा केे अच्छे दिन लाने के लिए भी यह करना जरूरी है।
०-नया इंडिया से साभार)
०००००००००००

LEAVE A REPLY