राजनीति

भारत-मां के मंदिर में पाखाना फैलाकर लोकतंत्र की पूजा बेमानी

०-उमेश त्रिवेदी बंगाल में दुर्गा-पूजा, भगवान राम और वंदे-मातरम् के चुनावी जयकारों के बीच एकाएक यह अनुत्तरित सवाल जहन में कुलाचे भरने लगा है कि...

सत्ता की धमक; डरा-सहमा चुनाव आयोग… ?

०-ओमप्रकाश मेहता हमारे संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के अनुसार देश में चुनावों के दौर में चुनाव आयोग सरकार से भी सर्वोपरि व शक्तिमान होता है,...

कांग्रेस की ताकत बनीं प्रियंका क्या भेद पाएंगी भाजपा के गढ़

०- अरुण पटेल मध्यप्रदेश में अंतिम चरण में 19 मई को जिन आठ लोकसभा क्षेत्रों में मतदान होने जा रहा उनमें से एक को छोड़कर...

सिख-दंगों पर ताजा बहस क्या ‘टाइम’ की उपाधि की पुष्टि है?

०-उमेश त्रिवेदी फिलवक्त, जबकि बजरिए मीडिया, भाजपा और उसकी सहयोगी पार्टी अकादी दल वोटों की फसल पकाने के लिए १९८४ के सिख-दंगों की राख में...

अंपायर और रेफरी के हुकुमनामे-कितने न्यायपूर्ण और तार्किक ?

०-विजय तिवारी लोकसभा चुनावों की गर्मी में नेताओं के कथन और उनके नियम सम्मत होने को लेकर बार-बार सवाल उठ खड़े हो रहे हैं। जिन्हें...
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