आर्थिक तंगी में भी देने कस भाव वाला बजट

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०- देवदत्त दुबे
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। इस समय मध्यप्रदेश आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। फिर भी वित्त मंत्री तरुण भानोट ने बजट में आमजन को कुछ देने का भाव प्रदर्शित किया है, लेकिन वचन पत्र में किए गए वादों को पूरा करना बजट में संभव दिखाई नहीं देता। मसलन किसानों की कर्ज माफी के लिए ४८ हजार करोड़ चाहिए थे जबकि बजट में आठ हजार करोड़ का प्रावधान किया गया है। दरअसल वित्त मंत्री तरुण भानोट ने अपने बजट भाषण की शुरुआत में कहा कि प्रजा के सुख में राजा का सुख है लेकिन राजा प्रजा को तभी सुखी रख पाएगा जब उसके अंदर देने का भाव हो और खजाना भरा हुआ हो, लेकिन इस समय प्रदेश सरकार का खजाना खाली है। ऐसे में वित्त मंत्री भले ही भाषण में देने का भाव प्रदर्शित करें, जब तक यथार्थ में आमजन के हाथ कुछ लगेगा नहीं तब तक वह अपने आपको कैसे सुखी महसूस करेंगे। यह कहना मुश्किल है क्योंकि अब जमाना उस दौर में जब निस्वार्थ प्रेम का बेहद अभाव है ऐसे में बजट में कोई नया कर ना लगाकर सरकार यह तो जता ही दिया है कि आर्थिक तंगी के दौर में भी आमजन का ख्याल रखा गया है। भले ही ही वचन पत्र में किए गए वादों को पूरा करने के लिहाज से बजट में संपूर्ण राशि का प्रावधान नहीं हो पाया हो। राज्य सरकार ने बुधवार को विधानसभा के चालू वित्त वर्ष के लिए बजट पेश कर दिया है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री तरुण भानोट ने बजट को किसानों, युवाओं और गरीबों का बजट बताया। देश में नेताओं के बीच आम आदमी बनने की जो होड़ लगी है उसका असर वित्त मंत्री तरुण भानोट पर भी दिखा जब वे रेप केस की जगह जूट के फोल्डर में बजट की कॉपी लेकर विधानसभा में पहुँचे। १५ साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार का यह पहला पूर्ण बजट था जिसमें कोशिश की गई कि गांव, गरीब, किसान, युवाओं और महिलाओं का खासा ध्यान रखा जाए। किसी भी प्रकार का टैक्स नहीं लगाकर व्यापारियों पर भी किसी तरह का बोझ नहीं डाला गया है। बजट में गांव के विकास के लिए पिछले सालों की अपेक्षा ज्यादा बजट रख गया है, साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री तरुण भानोट ने कमलनाथ सरकार का पहला बजट पेश करते हुए कई योजनाओं का ऐलान किया। उन्होंने किसानों और शिक्षा के लिए बजट में अधिक राशि जारी की। बजट में पर्यटन, परिवहन, शिक्षा, बिजली और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाओं को शुरू करने का ऐलान किया गया। नर्मदा किनारे बसे जबलपुर शहर से आने वाले वित्त मंत्री तरुण भानोट ने नर्मदा नदी के तट पर रिवर फ्रंट बनाने की घोषणा भी की। पहली बार बजट में कई प्रकार की खाद्य सामग्री की ब्रांडिंग की भी घोषणा की गई। हालांकि पूर्ण बजट आपत्ति और हंगामे के बीच पेश हो सका। इसके पहले ही वित्त मंत्री तरुण भानोट अपना बजट भाषण पढऩा शुरूकरते नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने ओचित्य का सवाल उठाते हुए कहा कि जब बजट सत्र की अधिसूचना जारी हो गई थी तो सरकार को पेट्रोल-डीजल पर दो रुपए प्रति लीटर टैक्स रातों-रात बढ़ाने की जरूरत क्यों आन पड़ी? इसी तरह जमीनों-मकानों की रजिस्ट्री के रेट में भी बजट पेश होने के पहले वृद्धि करना सदन का अपमान है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भार्गव की आपत्ति को खारिज करते हुए कहा कि केन्द्र ने अपने बजट में मध्यप्रदेश को मिलने वाली रकम में २७ करोड़ की कमी की है। इसके चलते ही हमें ताबड़तोड़ वैट बढ़ाना पड़ा लेकिन कमलनाथ की इन दलदलों से विपक्ष शांत नहीं हुई और हंगामे के बीच ही विधानसभा अध्यख नर्मदा प्रजापति ने वित्त मंत्री तरुण भानोट को बजट भाषण पढऩे की अनुमति दे दी। कुल मिलाकर सत्ताधारी दल कांग्रेस के नेता जहां बजट को आम जनता और प्रदेश के हित में बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल बजट को निराशाजनक सिद्ध करने पर तुले हैं। लेकिन इतना तय है कि आर्थिक तंगी के दौर में बजट में देने का भाव वित्त मंत्री ने प्रदर्शित किया है, लेकिन वचन पत्र में किए गए वादों को पूरा करने में सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।
०-नया इंडिया के कालम ”राजनैतिक गलियारा” से साभार)
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