अबकी बार भूरिया की राह नहीं दिख रही आसान ?

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। लम्बे समय तक झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र के सांसद के रूप में कांतिलाल भूरिया जिनको झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र के इतिहास में हुए पहले उपचुनाव में शिवराज सिंह सहित उनका पूरा मंत्रीमण्डल और लाव-लश्कर के साथ दिन-रात मतदाताओं को लुभानके के लिये लगा रहा यही नहीं हर तरह के प्रलोभन भी दिये लेकिन जिस झाबुआ क्षेत्र का मतदाता प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के तमाम प्रलोभन के बाद झांसे में न आकर कांतिलाल भूरिया को विजयश्री दिलाई थी आज उसी झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र में यह हालत हो गई कि कांतिलाल भूरिया के सामने कहीं सड़कों तो कहीं पाठशाला तो अन्य मुद्दों को लेकर लोग उनका विरोध करने लगे हैं और क्षेत्र का विकास न होने का आरोप लगा रहे हैं, यह सही है कि आजादी के बाद एक लम्बे समय से कांतिलाल भूरिया झाबुआ से सांसद रहे लेकिन विकास के नाम पर जितनी राशि झाबुआ को मुख्य बजट और योजना और उपयोजनाओं के माध्यम से मिला उस अनुपात से झाबुआ का विकास नहीं हुआ जितना भारतीय जनता पार्टी के १५ वर्षों के शासनकाल में यह स्थिति रही कि जो जिन आदिवासियों के परिवार वर्षों से टोले और घास-पूस के झोंपड़े में रहते थे आज उन आदिवासियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध हो गये, जिसके कारण वह आदिवासी आज भाजपा का गुणगान करने में लगे हुए हैं। तो भले ही गुणवत्ताविहीन सड़कों का जाल बिछा हो लेकिन टूटी-फूटी पगडंडियों की जगह इन गुणवत्ताविहीन सड़कों ने ले ली जिसकी वजह से लोगों का यातायात सुगम हो हुआ ही तो वहीं उनके व्यापार की भी गति बढ़ी। रतलाम-झाबुआ संसदीय क्षेत्र के अधिकांश गांव में लोग भाजपा शासनकाल में आजीविका योजना के तहत मिले लाभ से तमाम तरह की सब्जियों की खेती करने में जुट गये। यही वजह है कि आज भूरिया की कुर्सी खतरे में दिखाई देने लगी है और लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि जितना विकास भूरिया ने वर्षों से नहीं किया वह भाजपा ने १५ वर्षों में कर दिखाया, यह अलग बात है कि भाजपा के नेता उनके शासनकाल में पनपे हर तरह के अवैध कारोबार में व्यस्त रहे जिसकी वजह से उनका विरोध भी कई जगह है, तो वहीं झाबुआ और अलीराजपुर जिला शराब के अवैध कारोबार के लिये जाना जाता है और इसमें कई भाजपा के नेता लिप्त हैं। यही नहीं कि इस कारोबार में भाजपा के नेता ही लिप्त हों बल्कि कुछ कांग्रेसी नेताओं की भी रुचि इस कारोबार में कम नहीं है तभी तो भाजपा शासनकाल में कांतिलाल भूरिया की भतीजी कलावती भूरिया जो कि जिला जनपद की अध्यक्ष रही उन्होंने भी शराब के इस अवैध कारोबारियों के खिलाफ खूब धरना-प्रदर्शन की धमकियां दी लेकिन इन शराब के अवैध कारोबारियों के दबाव के आगे वह ठीक से सफल प्रदर्शन नहीं कर सकीं और जिले में शराब का अवैध कारोबार आज भी फल-फूल रहा है। भूरिया के आगे ऐसी कई समस्यायें इस समय खड़ी हो गईं जिसके कारण भूरिया की राह आसान दिखाई नहीं दे रही है। तो वहीं उस क्षेत्र के आदिवासी नेता जिनकी भूरिया से नाराजगी के चलते जैश जैसे संगठन का तो उदय हुआ ही है तो वहीं उस क्षेत्र के कई आदिवासी कांग्रेसी नेता भूरिया की सल्तनत को खत्म करने में लगे हुए हैं क्योंकि भूरिया के रहते क्षेत्र के आदिवासी कांग्रेसी नेताओं को अपना भविष्य अंधकारमय दिख रहा है। यही वजह है कि भाजपा के प्रत्याशी जीएस डामोर को उनकी सरल और मिलनसार कार्यशैली के चलते जो उनसे एक बार मिलता है वह उनका मुरीद हो जाता है, यही वजह रही कि डामोर ने पिछले विधानसभा चुनाव में कांतिलाल भूरिया के पुत्र विक्रम भूरिया को पछाड़कर विधायकी हासिल की और अब पार्टी ने जब उन्हें लोकसभा के लिये प्रत्याशी का चयन किया तो डमोर की सरल स्वभाव और मिलनसार नीति के चलते क्षेत्र में जहां भी जाओ वहां उनकी चर्चा सुनने को मिलती है, तो वहीं डामोर जहां भी जाते हैं लोग उनके मुरीद हो जाते हैं, इससे यह साफ दिखाई दे रहा है कि कांतिलाल भूरिया की राह अब आसान दिखाई नहीं दे रही है। लोग रात १०-११ बजे तक डामोर द्वारा किये जा रहे जनसम्पर्क में जो नजारा देखने को मिलता है उसे देखकर हर कोई यह कहने लगता है कि अब तो डामोर की जीत निश्चित है, क्षेत्र में स्थिति यह है कि डामोर जहां जनसम्पर्क के लिये निकल रहे हैं उनका लोग पलक-पांवड़े बिछाकर स्वागत करते नजर आ रहे हैं। लोकसभा क्षेत्र में डामोर ने अपने कम समय में जो लोगों के दिलों में जगह बनाई है उससे यह संभावना प्रबल होती दिखाई दे रही हैं कि डामोर की जीत को लोग निश्चित मानकर चल रहे हैं, तो वहीं क्षेत्र की कमान जहां संघ ने संभाल रखी है तो वहीं रतलाम के विधायक चेतन कश्यप भी डामोर को विजयश्री दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

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