अपने ही गृह जिले के लोगों के कंठ की प्यास नहीं बुझा पा रहे पीएचई मंत्री सुखदेव पांसे

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०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। राजनीति का कमाल देखो जिन राजनेताओं के भरोसे मतदाता आस लगाए रहते हैं कि उनकी समस्याओं का समाधान करेंगे लेकिन कमलनाथ मंत्री मण्डल के सदस्य लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे आदिवासी बाहुल्य ग्रामीणों की कण्ठ की प्यास बुझाने में असफल साबित हो रहे हैं, लेकिन जब उनसे बात करो तो यह वह यह दावा करते आते हैं कि हम अपने जिले के एक-एक गांव में घूम रहे हैं और जहां पानी की समस्या आ रही है उसका समाधान करने में लगे हुए हैं। उनके इस दावे की हकीकत इस बात से पता चलती है कि जब उनके ही जिले के मुख्यालय बैतूल में एक युवक टावर पर चढ़कर शोले फिल्म की स्टाइल में बसंती नहीं बल्कि पानी की समस्या की गुहार लगा रहा था लेकिन इसके बाद भी मंत्री की नींद नहीं खुली बल्कि बैतूल के युवक की पानी की मांग की समस्या को राजवद्र्धन सिंह का नगरीय क्षेत्र होने का दोषी मान रहे हैं लेकिन उनके जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त पानी की व्यवस्था का दावा पांसे कर रहे हैं, जबकि उनके ही जिले के भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कबारामाल ग्राम में हर साल गर्मी के मौसम में पानी की किल्लत का स्थाई निदान करने ग्रामीण दो सालों से जिले के हर अधिकारी के दर पर दस्तक दे चुके हैं लेकिन आज तक न तो जनप्रतिनिधियों ने कोई सुध ली और न ही प्रशासन की नींद खुल पाई, तो सवाल यह उठता है कि बैतूल जिले के जनप्रतिनिधि होने के कारण क्या सुखदेव पांसे भैंसदेही विधानसभा क्षेत्र के इस गांव के ग्रामीणों की समस्या से अवगत नहीं हैं, जबकि इस गंाव का आलम यह है कि गांव में निवास करने वाले ७०० से अधिक की आबादी गांव के बाहर स्थित एक कुंए से गंदे पानी से ग्रामीण अपनी प्यास बुझा रहे हैं। इन सबसे परेशान होकर ग्रामीणों ने ठान ली कि अब उनके गांव में जो भी वोट मांगने आएगा उसे वही पानी पिलाएंगे जो वह पी रहे हैं, इसके बाद उन्हें सहयोग देने न देने का निर्णय लिया जाएगा। ग्राम कबरामाल के प्रकाश पंवार का कहना है कि आजतक न तो सांसद इस गांव में आईं और न ही विधायक ही कभी गांव में आये हैं। प्रदेश के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सुखदेव पांसे के जिले का अकेला एक गांव नहीं जबकि बैतूल जिले के दो सैंकड़ों गांवों में पानी की किल्लत चरम पर पहुंच रही है, लेकिन सुखदेव पांसे जिनपर पूरे प्रदेश की जनता की प्यास बुझाने की जिम्मेदारी है उन सुखदेव पांसे को अपने ही जिले के ग्रामवासियों की प्यास बुझाने के लिये फुर्सत नहीं है, जिले के लोग बताते हैं कि जबसे वह मंत्री बने हैं तबसे वह भ्रमण के नाम पर केवल स्वागत कराने में मशगूल नजर आ रहे हैं लेकिन उन्हें एक-एक बूंद जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों की समस्या की ओर नहीं जा पा रहा है यह स्थिति पांसे के जिले की है तो बाकी प्रदेशभर के ग्रामीण क्षेत्रों का तो भगवान ही मालिक है। पानी की समस्या से जूझ रहा जिला अकेला सुखदेव पांसे का ही नहीं है बल्कि प्रदेश की सत्ता के मुखिया कमलाथ का छिंदवाड़ा जिला भी पानी की समस्या से जूझ रहा है तो वहीं दूसरी ओर हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव में झाबुआ-रतलाम संसदीय क्षेत्र के सांसद कांतिलाल भूरिया जिन्हें उनके उन मतदाताओं ने जिन्होंने झाबुआ संसदीय क्षेत्र के इतिहास में हुए उपचुनाव में शिवराज और उनके पूरे लाव-लश्कर की कड़ी मेहनत मशक्कत और पूरी प्रशासनिक मशीनरी को झोंक देने के बावजूद भी पराजित कर प्रदेश के मतदाताओं को भाजपा के खिलाफ मतदान करने का श्रीगणेश किया था, लेकिन विधानसभा चुनाव में उसी झाबुआ के मतदाताओं ने कांतिलाल भूरिया के पुत्र को पराजित कर यह संदेश दिया कि कांतिलाल भूरिया केवल नाम के सांसद हैं उनके कार्यकाल में जितनी राशि झाबुआ जिले के विकास के लिये आई उसका वह ठीक से विकास नहीं कर पाए और आज भी झाबुआ क्षेत्र का मतदाता तमाम समस्याओं से जूझ रहा है। यही वजह रही कि कांतिलाल भूरिया के उस दंभ को झाबुआ के मतदाताओं ने उनके पुत्र को पराजित कर यह संदेश दिया कि केवल हवा हवाई राजनीति नहीं की जा सकती है। हालांकि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भूरिया ने अपने मतदाताओं की नाराजगी का ठीकरा पीएचई विभाग में फेरबदल कर ठीकरा फोडऩे का काम किया। लेकिन उसी संसदीय क्षेत्र में आने वाले अलीराजपुर के अधिकांश गांव के निवासी आज भी फ्लोराइडयुक्त पानी पी रहे हैं इसकी भूरिया को चिंता नहीं रही, मजे की बात तो यह है कि अपने पुत्र की हार का ठीकरा पीएचई विभाग पर फोडऩे वाले कांतिलाल भूरिया को शायद यह भी नहीं मालूम की अलीराजपुर में पीएचई विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव के फर्जी टेलीफोन पर अलीराजपुर के ईई ने उनके विभाग में काम करने वाले एक ठेकेदार से दस लाख रुपए खाते में जमा करवा दिये थे जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई। सवाल यह उठता है कि जिस गुजरात के ठेकेदार से दस लाख रुपए पीएस के फर्जी फोन पर फर्जी खाते में ईई के निर्देश पर ठेकेदार ने दस लाख रुपए जमा किए थे क्या उस ठेकेदार की भरपाई किसने की होगी। इस सवाल का जवाब आज भी लोग खोजने में लगे हुए हैं और पीएचई विभाग के ईई से यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर दस लाख की भरपाई कैसे की जाएगी तो ईई का सीधा जवाब होता है कि ठेकेदार ने कह दिया कि हम घाटा उठा लेंगे, हालांकि यह मामला पुलिस की जद में है और आज तक वह फर्जी विभाग के प्रमुख सचिव और बताये गये फर्जी खातेदार का पता नहीं चल सका। सवाल यह उठता है कि एक ओर जहां पीएचई मंत्री के गृह जिले की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है और गंदा पानी पीने को मजबूर है तो दूसरी ओर अपने पुत्र की हार का ठीकरा पीएचई में फेरबदल करवाने वाले कांतिलाल भूरिया के संसदीय क्षेत्र अलीराजपुर के वह आदिवासी जिनकी बदौलत कांतिलाल भूरिया अभी तक सांसद बनते रहे लेकिन अभी तक उन्हें शायद यह नहीं पता कि अलीराजपुर के उनके आदिवासी मतदाता फ्लोराइडयुक्त पानी पी रहे हैं, हाँ, यह जरूर है कि पुत्रमोह में फंसकर उन्होंने अपनी पुत्र की हार का ठीकरा पीएचई विभाग पर अपनी सत्ता होने के बल पर बदलाव करने में कामयाबी तो हासिल कर ली लेकिन अपने संसदीय क्षेत्र के अलीराजपुर के उन आदिवासियों की चिंता उन्हें अभी भी नहीं है, जो फ्लोराइडयुक्त पानी पीने को मजबूर हैं हालांकि कांतिलाल भूरिया भले ही अपने आपको बड़ा नेता होने का भ्रम पाले हों लेकिन इस बार उनका विरोध विकास के कई मामलों पर हो रहा है।

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