अध्यक्ष के चयन को लेकर शिवराज ने साधे कई निशाने

0
66

०-अवधेश पुरोहित
भोपाल। (हिन्द न्यूज सर्विस)। हाल ही में सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव भले ही भाजपा और कांग्रेस के बीच हुआ हो लेकिन हकीकत यह है कि यह चुनाव भाजपा और जनता के बीच हुआ है और जनता ने ही पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की १३ वर्षों की वह भ्रष्टतम सरकार जिसमें शिवराज के १५६ माह के कार्यकाल में १५६ घोटालों की फेहरिस्त तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव ने मीडिया को एक पत्रकार वार्ता में जारी की थी, उन्हीं सब घोटालों और शिवराज सरकार में बही भ्रष्टाचार की ऊपर से नीचे तक बह रही गंगोत्री के चलते परेशान होकर प्रदेश की जनता ने उन भाजपाई नेताओं की जो उमा भारती के शासनकाल में अपनी सम्पत्ति बेचकर भोपाल में शिफ्ट होने का मन बना रहे थे लेकिन शिवराज के सत्ता में आते ही उनकी एक तरह से लाटरी खुल गई और इन भाजपा नेताओं के साथ-साथ ऐसे भाजपा नेताओं की भी बन आई जिनकी हैसियत टूटी साइकल की नहीं थी लेकिन आज वह आलीशान भवनों और लग्जरी वाहनों में फर्राटे भरते नजर आ रहे हैं शिवराज सरकार में बही भ्रष्टाचार की गंगोत्री के चलते जहां उनके मंत्रिमण्डल की सदस्य पिछड़े बुंदेलखण्ड के अंतर्गत आने वाली छतपुुर जिले की राज्यमंत्री श्रीमती ललिता यादव की सम्पत्ति में २४३ प्रतिशत की वृद्धि होना यह साबित करता है कि शिवराज शासनकाल में मंत्री से लेकर भाजपा के नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने जमकर भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाकर सरकारी योजनाओं में अधिकारियों से मिलकर घोटालों को अंजाम दिया इन्हीं घोटालों से प्रेरित होकर शायद जब ललिता यादव जब मंत्री बनने के बाद अपने प्रभार वाले जिले श्योपुर पहुंची थीं तो उनके परिजनों के साथ-साथ छतरपुर के ठेकेदारों का लाव लश्कर भी शामिल था, इससे यह संकेत मिलते हैं कि भाजपा के और खासकर शिवराज सिंह के शासनकाल में भाजपा के नेताओं और मंत्रियों ने किस तरह के कारनामों को अंजाम दिया। यही नहीं शिवराज सिंह के १३ वर्षों के शासनकाल में भाजपा के जनप्रतिनिधियों, नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्री के परिजनों ने हर प्रकार के अवैध कारोबार चाहे वह रेत उत्खनन का मामला हो या अवैध शराब का कारोबार हर तरह के अवैध कारोबार को संरक्षण देकर खूब अवैध कमाई की तो वहीं शिवराज सरकार जाने के बाद ८२ प्रतिशत पूंजी की चिंता में लगे तमाम उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने वाले उद्योगपति को भी अपने भविष्य की चिंता सताने लगी, इन्हीं सभी दबाव के बीच शिवराज सिंह जिनकी सरकार को कांग्रेस ने नहीं बल्कि जनता ने उखाड़ फेंका लेकिन आज भी शिवराज सिंह विपक्ष में बैठने का मन नहीं बना पा रहे हैं और उन्हें आज भी उन सभी लोगों की चिंता है जो शिवराज के शासनकाल में सत्ता के संरक्षण में सारे अवैध कारोबार करने में लगे थे उनके हितों की रक्षा करने के लिये शिवराज सिंह आज भी भले ही मुख्यमंत्री न हों लेकिन अपने आपको मुख्यमंत्री मानकर चल रहे हैं तभी तो मध्यप्रदेश विधानसभा में अध्यक्ष के चुनाव के बहाने वह कांग्रेस की वह सरकार को जिसे जनता ने चुना है उसे अपदस्थ करने की मुहिम चलाए हुए थे उनकी इस तरह की कार्यशैली से यह साफ जाहिर हो जाता है कि आज भी शिवराज सिंह उन्हीं सब अवैध कारोबारियों के संरक्षण में लगे हुए हैं, भले ही पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने उन्हें भले ही चाहे नेता प्रतिपक्ष न बनाया हो लेकिन आज भी वह मुख्यमंत्री नहीं तो नेताप्रतिपक्ष अपने आपको मानकर चल रहे हैं उनकी मंशा के विपरीत गोपाल भार्गव नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के बावजूद भी अध्यक्ष के चुनाव के दौरान सदन में उन्होंने गोपाल भार्गव को बोलने नहीं दिया तो वहीं इसका विरोध करने का फैसला भी बिना नेता प्रतिपक्ष की सलाह लिये अध्यक्ष के चुनाव में भाग नहीं लिया और यह भी निर्णय ले लिया कि कांग्रे्रस की इस तरह रवैये की वह राजभवन तक पैदल जाकर शिकायत दर्ज कराएंगे और ऐसा उन्होंने किया, इससे यह साफ जाहिर हो जाता है कि आने वाले समय में भी शिवराज सिंह नेता ब्राह्मण नेता गोपाल भार्गव के समक्ष आये दिन कुछ न कुछ समस्या खड़ी करेंगे ही क्योंकि उनके शासनकाल में उन सभी अवैध कारोबारियों का दबाव है कि कैसे भी हो कांग्रेस सरकार को हटाकर भाजपा की सरकार बने, जैसा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा और खासकर शिवराज सिंह के संकट मोचन पर कांग्रेस के विधायक और उनकी सरकार को सहयोगी के रूप में समर्थन दे रहे सपा, बसपा और निर्दलीय विधायकों को खरीदने की कोशिश भी शिवराज सिंह के पहल पर किये जाने की खबर है, तो वहीं शिवराज सिंह ने इस तरह की रणनीति के चलते एक तीर से कई निशाने साधने की भी राजनीतिक हल्कों में चर्चा है जहां उन्होंने कांग्रेस के अध्यक्ष चुने जाने के मामले में भी व्यवधान डालकर अपना अध्यक्ष बनाने की कोशिश तो की है तो वहीं प्रदेश की वह राज्यपाल जो भारतीय जनता पार्टी की ही मोदी सरकार द्वारा यहां पदस्थ की गईं उन राज्यपाल पर निशाना इस मामले को लेकर साधा कि उन्होंने कांग्रेस की सरकार के मुखिया कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद की शपथ क्यों दिलाई हालांकि इसका जवाब कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस तरह से दिया कि राज्यपाल ने कमलनाथ को शपथ दिलाई इसके लिये वह राज्यपाल से पूछे कि ऐसा उन्होंने क्यों किया लेकिन शिवराज सिंह जो अभी भी मुख्यमंत्री होने का भ्रम पाले हुए हैं यही वजह है कि उन्होंने यह भी निर्णय लेकर कि उनका दल राज्यपाल के अभिभाषण में मौजूद नहीं रहेगा और सदन का बहिष्कार कर डाला राजनीतिक इतिहास में शायद ही ऐसा कोई अवसर देखा गया हो कि चाहे राष्ट्रपति हो या राज्यपाल उनके अभिभाषण में विपक्ष की गैर मौजूदगी की स्थिति कभी नहीं बनी लेकिन शिवराज सिंह ने भी यह इतिहास मध्यप्रदेश विधानसभा में लिख डाला आम तौर पर विपक्ष राष्ट्रपति या राज्यपाल के अभिभाषण के समय मौजूद तो रहता है जब कभी उसे अभिभाषण में कभी कुछ गलत लगता है तो अभिभाषण के दौरान टोका-टोकी के उदाहरण जरूर मिलते हैं लेकिन शिवराज अभी भी अवैध कारोबारियों के दबाव में आज भी कांग्रेस सरकार को सत्ता से अपदस्थ करने का कोई मौका छोडऩे को इसलिये तैयार नहीं हैं क्योंकि उन्हें सत्ता का मोह आज भी है, तभी तो वह इस तरह की रणनीति को अंजाम दे रहे हैं जो प्रजातंत्र के लिये उचित नहीं मानी जाती। यही वजह है कि भाजपा ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में भले ही अपने वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव को चुन लिया हो, लेकिन लगता है कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सत्ता का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं। वे नेता प्रतिपक्ष भार्गव को दरकिनार कर विपक्ष की कमान पूरी तरह अपने हाथों में लेने की कोशिश कर रहे हैं। यह नजारा विधानसभा में स्पीकर के चुनाव के दौरान देखने को मिला । वेसदन से लेकर सड़क भाजपा को लीड करते हुए नजर आए। स्पीकर चयन को लेकर जब हंगामा हो रहा था, वो शिवराज ने सदन की कार्रवाई का बहिष्कार का ऐलान कर पैदल मार्च की अगुवाई की। जबकि ये जिम्मा नेताप्रतिपक्ष भार्गव का जिम्मा था। इसके बाद जब भाजपा विधायक सदन का बहिश्कार कर पैदल मार्च कर राज्यपाल से मिलने के लिए निकलेतो इसकी भी अगुवाई शिवराज सिंह करते दिखे। इसी तरह जब मीडिया से बात करने की बारी आई तो मोर्चा नरोत्तम को दे दिया। भाजपा के ही अंदरुनी सूत्रों का कहना है कि शिवराज मप्र की राजनीति में लीड करने की मानसिकता से सक्रिय रहेंगे। हालांकि संघ और संगठन नहीं चाहता कि शिवराज प्रदेश की राजनीति में किसी भी तरह की अगुवाई करें।

०००००००००००००

LEAVE A REPLY